संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल

भारत ने 21 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की “सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा” विषयक खुली बहस में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने पाकिस्तान के कथित नरसंहार और नागरिकों के खिलाफ हिंसक कार्रवाइयों का मुद्दा उठाया। यह बयान उस समय दिया गया जब पाकिस्तान ने उसी बहस में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुली बहस आयोजित करती है। “सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा” भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर सदस्य देश अपने विचार रखते हैं। सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है और इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य शामिल होते हैं। परिषद का मुख्य दायित्व वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।

ऑपरेशन सर्चलाइट और 1971 का संदर्भ

भारत ने अपने बयान में 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का उल्लेख किया। यह सैन्य अभियान पाकिस्तान सेना द्वारा मार्च 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में चलाया गया था। उस समय पूर्वी पाकिस्तान में व्यापक हिंसा और दमन की घटनाएं हुई थीं। बाद में भारत-पाकिस्तान युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बना। यह संघर्ष दक्षिण एशिया के इतिहास और भारत-पाकिस्तान संबंधों में आज भी महत्वपूर्ण संदर्भ माना जाता है।

अफगानिस्तान में नागरिकों को नुकसान का मुद्दा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान यानी यूनामा की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। यूनामा ने 2026 के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा के कारण 750 नागरिकों की मौत और घायल होने की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार 95 में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया गया। यूनामा ने यह भी बताया कि सीमा पार हिंसा के कारण 94 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए। भारत ने मार्च 2026 में रमजान के दौरान काबुल स्थित ओमिद नशा मुक्ति उपचार अस्पताल पर हुए हवाई हमले का भी जिक्र किया।

भारत-पाकिस्तान कूटनीतिक तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और सीमा पार हिंसा जैसे मुद्दों को लेकर लगातार आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस बहस में भी दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने-अपने पक्ष प्रस्तुत किए। भारत ने अपने वक्तव्य में नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। ” पूर्वी पाकिस्तान 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना। ” यूनामा की स्थापना वर्ष 2002 में अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र मिशन के रूप में हुई थी। ” “सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा” संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की नियमित बहस का महत्वपूर्ण विषय है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का यह बयान दक्षिण एशिया से जुड़े सुरक्षा और मानवीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर आगे भी प्रभाव पड़ सकता है।

Originally written on May 22, 2026 and last modified on May 22, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *