आईएसएस पर कैंसर और ऊतक अनुसंधान के नए प्रयोग
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर तैनात नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने मई 2026 में कैंसर उपचार, कार्टिलेज ऊतक विकास, हृदय स्टेम सेल और डीएनए-प्रेरित नैनोमैटेरियल्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण जैव-चिकित्सीय प्रयोग किए। ये अनुसंधान एक्सपीडिशन 74 मिशन के दौरान जापानी किबो प्रयोगशाला मॉड्यूल और उसकी लाइफ साइंस ग्लोवबॉक्स सुविधा में संपन्न हुए। वैज्ञानिकों का मानना है कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में किए गए ऐसे प्रयोग भविष्य में चिकित्सा विज्ञान और कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकते हैं।
माइक्रोग्रैविटी में कैंसर उपचार अनुसंधान
नासा के फ्लाइट इंजीनियर क्रिस विलियम्स ने किबो प्रयोगशाला में स्पेस कैंसर थैरेप्यूटिक्स से जुड़ा हार्डवेयर स्थापित किया। इस प्रयोग का उद्देश्य यह समझना था कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में कैंसर-रोधी दवाएं किस प्रकार व्यवहार करती हैं और उनका आणविक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन विशेष रूप से अग्नाशय कैंसर के उपचार पर केंद्रित था। वैज्ञानिकों का मानना है कि माइक्रोग्रैविटी में कैंसर कोशिकाएं त्रि-आयामी संरचनाओं में विकसित होती हैं, जिससे वास्तविक ट्यूमर जैसी स्थिति का अध्ययन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अंतरिक्ष में कार्टिलेज ऊतक विकास
नासा की फ्लाइट इंजीनियर जेसिका मेयर ने किबो की लाइफ साइंस ग्लोवबॉक्स में कार्टिलेज ऊतक विकसित करने की तकनीकों पर काम किया। कार्टिलेज शरीर का एक महत्वपूर्ण संयोजी ऊतक है, जो जोड़ों, नाक, कान और पसलियों में पाया जाता है। अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी की स्थिति वैज्ञानिकों को ऊतकों की त्रि-आयामी वृद्धि का अध्ययन करने में मदद करती है। इससे भविष्य में क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत और पुनर्जनन चिकित्सा में नई तकनीकों का विकास संभव हो सकता है।
हृदय कोशिकाएं और डीएनए आधारित नैनोमैटेरियल्स
23 अप्रैल 2026 को जेसिका मेयर ने हृदय स्टेम कोशिकाओं और निमोनिया उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया पर आधारित अध्ययन किए। इनका उद्देश्य हृदय रोगों के उपचार से जुड़ी नई तकनीकों का परीक्षण करना था। उसी दिन नासा के जैक हैथवे और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनोट ने डीएनए-प्रेरित नैनोमैटेरियल्स तैयार किए। इन सामग्रियों का उपयोग कैंसर और दीर्घकालिक बीमारियों के उपचार में इम्यूनोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसी तकनीकों में किया जा सकता है।
माइक्रोग्रैविटी और कैंसर मॉडल
सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में कैंसर कोशिकाएं तेजी से त्रि-आयामी ट्यूमर मॉडल बनाती हैं। इन्हें ट्यूमर स्फेरॉइड और ऑर्गेनॉइड कहा जाता है। वर्ष 2024 में आईएसएस नेशनल लैबोरेटरी और नासा ने कैंसर अनुसंधान के लिए पांच परियोजनाओं का चयन किया था। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो के वैज्ञानिकों ने माइक्रोग्रैविटी में रोगियों से प्राप्त ट्यूमर ऑर्गेनॉइड का अध्ययन किया। दिसंबर 2024 में सैनफोर्ड स्टेम सेल इंस्टीट्यूट में किए गए प्रयोगों में ट्यूमर स्फेरॉइड 10 दिनों में तीन गुना तक बढ़ गए थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित एक अनुसंधान प्रयोगशाला है। ” किबो जापान का प्रयोगशाला मॉड्यूल है, जिसका उपयोग जैव-विज्ञान प्रयोगों के लिए किया जाता है। ” माइक्रोग्रैविटी में कैंसर कोशिकाएं त्रि-आयामी ट्यूमर मॉडल बनाती हैं। ” पेम्ब्रोलिज़ुमैब कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली एक महत्वपूर्ण दवा है। अंतरिक्ष में किए जा रहे ये जैव-चिकित्सीय प्रयोग चिकित्सा विज्ञान के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। माइक्रोग्रैविटी में कोशिकाओं और ऊतकों के व्यवहार का अध्ययन कैंसर, हृदय रोग और ऊतक पुनर्जनन जैसी जटिल चुनौतियों के समाधान में नई दिशा दे सकता है।