पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद बैठक में सहकारी संघवाद और सुरक्षा मुद्दों पर फोकस

पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद बैठक में सहकारी संघवाद और सुरक्षा मुद्दों पर फोकस

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 7 सितंबर 2026 को गोवा के पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का आयोजन अंतर-राज्य परिषद सचिवालय के तहत किया गया और इसमें राज्यों के बीच समन्वय, प्रशासनिक मुद्दों तथा क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की भूमिका

पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद भारत की उन वैधानिक सलाहकारी संस्थाओं में से एक है, जिनका उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच संवाद को मजबूत करना है। इसकी स्थापना राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी। परिषद का मुख्य काम ऐसे मुद्दों पर चर्चा करना है, जिनमें एक से अधिक राज्यों की भागीदारी या आपसी समन्वय की जरूरत होती है।

इस परिषद के दायरे में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव आते हैं। गोवा के मुख्यमंत्री परिषद के उपाध्यक्ष होते हैं, जबकि केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासक भी बैठकों में सदस्य के रूप में भाग लेता है।

बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई

2026 की बैठक में सहकारी संघवाद, अंतर-राज्यीय समन्वय, महिलाओं के खिलाफ अपराध, फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और गांव स्तर पर बैंकिंग सेवाओं जैसे विषयों पर विचार किया गया। ये सभी मुद्दे प्रशासनिक दक्षता, न्यायिक प्रक्रिया की गति और स्थानीय स्तर पर सेवाओं की पहुंच से जुड़े हैं।

क्षेत्रीय परिषदें आम तौर पर सीमा विवाद, परिवहन संपर्क, बिजली बंटवारे और जल-संबंधी मामलों जैसे विषयों पर भी चर्चा करती हैं। ऐसे मंच राज्यों को औपचारिक बातचीत का अवसर देते हैं, जिससे जटिल मुद्दों का समाधान आपसी सहमति से निकालने में मदद मिलती है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं क्षेत्रीय परिषदें

भारत जैसे संघीय ढांचे वाले देश में क्षेत्रीय परिषदें केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग का व्यावहारिक मंच मानी जाती हैं। ये परिषदें केवल शिकायतों के निपटारे का माध्यम नहीं हैं, बल्कि नीति-समन्वय, प्रशासनिक तालमेल और क्षेत्रीय विकास को आगे बढ़ाने का भी साधन हैं।

अंतर-राज्य परिषद सचिवालय इन बैठकों के आयोजन और समन्वय में प्रशासनिक सहायता देता है। इसी वजह से परिषदों की बैठकें केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था के महत्वपूर्ण संवाद मंच के रूप में देखी जाती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में कुल पांच क्षेत्रीय परिषदें हैं: उत्तरी, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी।
  • क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी।
  • अंतर-राज्य परिषद सचिवालय क्षेत्रीय परिषद बैठकों को संगठनात्मक सहायता प्रदान करता है।
  • फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें निर्दिष्ट आपराधिक मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए बनाई जाती हैं।

पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक दिखाती है कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच नियमित संवाद किस तरह प्रशासनिक समस्याओं के समाधान और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करता है।

Originally written on September 7, 2026 and last modified on September 7, 2026.

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