नशामुक्त भारत 2029 रोडमैप से नशा-रोधी अभियान को नई दिशा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6 सितंबर 2026 को गोवा के पणजी में ‘नशामुक्त भारत 2029’ रोडमैप जारी किया। राज्य की सुरक्षा और मादक पदार्थों से जुड़ी समीक्षा बैठक के बाद पेश किया गया यह तीन वर्षीय खाका 2026 से 2029 तक लागू रहेगा और इसका फोकस ड्रग नेटवर्क तोड़ने, फरार आरोपियों को पकड़ने, अवैध प्रयोगशालाओं को नष्ट करने तथा नशे की मांग घटाने पर है।
चार स्तंभों पर आधारित रणनीति
इस रोडमैप को चार प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है। इनमें खुफिया जानकारी और अभियान-आधारित कार्रवाई, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, मांग एवं नुकसान में कमी, तथा क्षमता निर्माण और समन्वय शामिल हैं। प्रीकर्सर रसायन वे पदार्थ होते हैं जिनका उपयोग मादक और मनोदैहिक पदार्थों के निर्माण में किया जाता है।
योजना के तहत सीमा क्षेत्रों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और जांच में ‘बॉटम-टू-टॉप’ तथा ‘टॉप-टू-बॉटम’ मॉडल लागू करने की बात कही गई है। इसका अर्थ है कि जांच केवल सड़क स्तर की सप्लाई चेन तक सीमित न रहकर ऊपर तक फैले तस्करी और वित्तीय नेटवर्क को भी निशाना बनाएगी।
लक्ष्य: नेटवर्क, फरार आरोपी और अवैध लैब
‘नशामुक्त भारत 2029’ रोडमैप में 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने, 100 नार्कोटिक्स से जुड़े फरार आरोपियों को वापस लाने और 100 गुप्त मादक पदार्थ प्रयोगशालाओं को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है। यह संकेत देता है कि सरकार अब केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरी सप्लाई चेन और उसके पीछे के ढांचे को तोड़ने पर जोर दे रही है।
नशा-रोधी नीति को आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध के व्यापक ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि तस्करी के साथ सीमा पार स्मगलिंग, अवैध वित्तीय प्रवाह और छिपी हुई उत्पादन इकाइयाँ भी जुड़ी होती हैं।
जनभागीदारी और उपचार ढांचे पर जोर
अभियान का लक्ष्य 50 करोड़ नागरिकों तक पहुंच बनाना और एक लाख ‘नशामुक्त मित्र’ तैयार करना है। इसके लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर, राष्ट्रीय सेवा योजना और MY Bharat जैसे युवा-आधारित मंचों का उपयोग किया जाएगा।
सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन मिलकर नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। योजना के अनुसार कार्यरत ड्रग de-addiction centres की संख्या 1,751 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। ऐसे केंद्र नशे की लत से जूझ रहे लोगों को चिकित्सकीय और मनोसामाजिक उपचार उपलब्ध कराते हैं।
जब्ती के आंकड़े और नीति का संदर्भ
भारत में ड्रग जब्ती के जो आंकड़े सामने रखे गए हैं, उनके अनुसार 2004 से 2014 के बीच 26 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 40,000 करोड़ रुपये थी। वहीं 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा 1.19 करोड़ किलोग्राम से अधिक और मूल्य 1.89 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट, 1985 भारत का प्रमुख मादक पदार्थ कानून है।
- प्रीकर्सर रसायनों पर नियंत्रण इसलिए जरूरी है क्योंकि इनका उपयोग सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में होता है।
- राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना, दोनों का उपयोग जन-जागरूकता और सामाजिक अभियानों में किया जाता है।
- ड्रग de-addiction centres नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार और पुनर्वास सहायता देते हैं।
कुल मिलाकर, यह रोडमैप नशा-रोधी अभियान को कानून-व्यवस्था, जनभागीदारी और उपचार व्यवस्था के साथ जोड़ने की कोशिश है। आने वाले वर्षों में इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र और राज्य एजेंसियां कितनी समन्वित और सतत कार्रवाई कर पाती हैं।