दीनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने से प्रशासनिक बदलाव
भाजपा के राज्यसभा सदस्य और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दीनेश शर्मा को 5 सितंबर 2026 को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जारी आदेश के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार संभाला। इस नियुक्ति के साथ केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव हुआ है।
कौन हैं डॉ. दीनेश शर्मा
डॉ. दीनेश शर्मा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे 2017 से 2022 तक राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे। इससे पहले वे लखनऊ के महापौर भी रह चुके हैं और 2006 तथा 2012 के चुनावों में दो बार इस पद पर चुने गए थे। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी रही है, जिसके बाद उन्हें केंद्रशासित प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई।
उपराज्यपाल की भूमिका क्यों अहम होती है
भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक या उपराज्यपाल के माध्यम से किया जाता है। उपराज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी करते हैं। दिल्ली, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में यह पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां शासन-प्रशासन की संरचना राज्यों से अलग होती है।
अंडमान-निकोबार की प्रशासनिक और भौगोलिक पहचान
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी में स्थित भारत का केंद्रशासित प्रदेश है। यह दो प्रमुख द्वीप समूहों—अंडमान द्वीप और निकोबार द्वीप—से मिलकर बना है। इसकी राजधानी पोर्ट ब्लेयर है। रणनीतिक स्थिति, समुद्री सीमाओं और द्वीपीय प्रशासन के कारण यह क्षेत्र प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 239 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन से संबंधित है।
- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का दक्षिणीतम केंद्रशासित प्रदेश है।
- पोर्ट ब्लेयर अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की प्रशासनिक राजधानी है।
- राज्यसभा संसद का उच्च सदन है, जिसके सदस्य राज्य विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं या कुछ मामलों में मनोनीत होते हैं।
डॉ. शर्मा की नियुक्ति से अंडमान-निकोबार प्रशासन में नई जिम्मेदारी आई है, जबकि उनके राज्यसभा पद पर भी रिक्ति बनी है। इससे केंद्रशासित प्रदेश के नेतृत्व और संसदीय प्रतिनिधित्व, दोनों स्तरों पर बदलाव दर्ज हुआ है।