महाराष्ट्र में मिली नई बिना-पैरों वाली उभयचर प्रजाति

महाराष्ट्र में मिली नई बिना-पैरों वाली उभयचर प्रजाति

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के चंदगड तहसील के बुजवाड़े गांव से एक नई भूमिगत, बिना पैरों वाली उभयचर प्रजाति का वैज्ञानिक रूप से वर्णन किया गया है। इस प्रजाति का नाम Gegeneophis chandgadi रखा गया है। यह खोज भारत की उभयचर विविधता, खासकर पश्चिमी घाट क्षेत्र में छिपी जैव-विविधता की ओर ध्यान खींचती है।

कैसी होती हैं कैसिलियन प्रजातियां

कैसिलियन उभयचरों का एक ऐसा समूह है जो दिखने में केंचुए या सांप जैसी आकृति रखता है, लेकिन ये उभयचर होते हैं। ये Gymnophiona क्रम में आते हैं और मुख्य रूप से मिट्टी के भीतर, पत्तों की परतों में या नम स्थानों के पास रहते हैं। इनके अंग विकसित नहीं होते या बहुत कम विकसित होते हैं, इसलिए ये खुदाई करके जीवन जीने के लिए अनुकूलित होते हैं।

इनकी आंखें अक्सर छोटी होती हैं और कुछ प्रजातियों में त्वचा या हड्डी से ढकी भी हो सकती हैं। इसी कारण ये जीव सामान्य तौर पर कम दिखाई देते हैं और इनके बारे में जानकारी भी सीमित रहती है।

Gegeneophis chandgadi की पहचान कैसे हुई

नई प्रजाति का वर्णन Records of the Zoological Survey of India में 2 सितंबर 2026 को प्रकाशित किया गया। यह प्रजाति Gegeneophis वंश से संबंधित है, जिसमें पश्चिमी घाट क्षेत्र के भारतीय कैसिलियन शामिल हैं। वैज्ञानिक विवरण के अनुसार यह प्रजाति कृमि जैसी और मांस-रंग की है।

इसकी पहचान में शरीर पर बने रिंग-जैसे खंड, जिन्हें annuli कहा जाता है, महत्वपूर्ण रहे। इसके पूरे शरीर की लंबाई में प्राथमिक रिंग्स पाई गईं, जबकि पीछे के आधे हिस्से में द्वितीयक रिंग्स भी देखी गईं। इन्हीं संरचनात्मक लक्षणों के आधार पर इसे अलग प्रजाति के रूप में पहचाना गया।

पश्चिमी घाट की जैव-विविधता में नया संकेत

इस प्रजाति का नाम क्षेत्र में बोली जाने वाली चंदगडी मराठी बोली के आधार पर रखा गया है। यह स्थानीय पहचान और वैज्ञानिक नामकरण के बीच एक दिलचस्प संबंध भी दिखाता है। पश्चिमी घाट भारत का एक प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट है और उभयचरों की विविधता के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और गोवा में फैली यह पर्वत श्रृंखला कई स्थानिक प्रजातियों का घर है। भारत में कैसिलियन की कई प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें से अनेक पश्चिमी घाट से ही मिली हैं। इसी क्षेत्र से Gegeneophis valmiki जैसी एक अन्य कैसिलियन प्रजाति का उल्लेख भी 2026 में हुआ था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कैसिलियन उभयचरों का क्रम Gymnophiona कहलाता है।
  • ये जीव बिना पैरों वाले होते हैं और भूमिगत जीवन के लिए अनुकूलित होते हैं।
  • पश्चिमी घाट को भारत का एक प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट माना जाता है।
  • Records of the Zoological Survey of India भारतीय प्राणी सर्वेक्षण से जुड़ी एक वैज्ञानिक प्रकाशन श्रृंखला है।

Gegeneophis chandgadi की खोज यह दिखाती है कि भारत के कई क्षेत्रों में अभी भी ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं जिनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण बाकी है। पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र में ऐसी खोजें संरक्षण और शोध, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

Originally written on September 7, 2026 and last modified on September 7, 2026.

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