पद्मश्री गिरीश भारद्वाज का निधन, देश ने खोया ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’

पद्मश्री गिरीश भारद्वाज का निधन, देश ने खोया ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’

भारत के प्रसिद्ध समाजसेवी और पद्मश्री सम्मानित अभियंता गिरीश भारद्वाज का 7 जुलाई 2026 को 76 वर्ष की आयु में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के सुल्लिया स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारी का उपचार करा रहे थे। ग्रामीण भारत में कम लागत वाले सस्पेंशन पुलों के निर्माण के माध्यम से लाखों लोगों का जीवन आसान बनाने वाले गिरीश भारद्वाज को पूरे देश में “ब्रिज मैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता था। उनके निधन से सामाजिक सेवा और ग्रामीण अवसंरचना के क्षेत्र में एक युग का अंत माना जा रहा है।

ग्रामीण भारत के लिए समर्पित जीवन

गिरीश भारद्वाज ने मैसूर क्षेत्र के मंड्या स्थित पीईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स के बजाय ग्रामीण समाज की समस्याओं के समाधान के लिए किया। तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में कार्य किया, जहाँ नदियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लोगों का आवागमन बेहद कठिन था। उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों में 140 से अधिक कम लागत वाले सस्पेंशन पुलों का निर्माण कराया। इन पुलों ने दूर-दराज़ के गांवों को स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और सरकारी सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यों से हजारों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

पहला पुल बना प्रेरणा का आधार

गिरीश भारद्वाज ने वर्ष 1989 में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के अरंबूर में पायस्विनी नदी पर अपना पहला सस्पेंशन पुल बनाया। इस परियोजना की सफलता के बाद उन्होंने देश के कई राज्यों में इसी मॉडल पर पुलों का निर्माण किया। उनके द्वारा विकसित कम लागत वाली तकनीक ने यह साबित किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावी और टिकाऊ अवसंरचना तैयार की जा सकती है। उनके बनाए पुल विशेष रूप से कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और ओडिशा के ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में लोगों के लिए जीवनरेखा साबित हुए।

पद्मश्री से हुआ सम्मानित

ग्रामीण अवसंरचना और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया। यह सम्मान उनके नवाचार, सामाजिक प्रतिबद्धता और जनहित के प्रति समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण सम्मान था। गिरीश भारद्वाज अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी उषा का निधन पहले ही हो चुका था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
  • सस्पेंशन पुलों में पुल के डेक को सहारा देने के लिए मजबूत केबलों या जंजीरों का उपयोग किया जाता है।
  • पीईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग कर्नाटक के मंड्या में स्थित एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान है।
  • पायस्विनी नदी कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र की प्रमुख नदियों में से एक मानी जाती है।

गिरीश भारद्वाज का जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि तकनीकी ज्ञान का उपयोग समाज के सबसे दूरस्थ और जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए किया जा सकता है। उनके द्वारा निर्मित पुल केवल दो किनारों को ही नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा और बेहतर जीवन की संभावनाओं को भी जोड़ते रहे। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

Originally written on July 7, 2026 and last modified on July 7, 2026.

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