नेपाल में संपर्क बहाली के लिए भारत ने भेजे बेली ब्रिज के हिस्से

नेपाल में संपर्क बहाली के लिए भारत ने भेजे बेली ब्रिज के हिस्से

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित सड़क संपर्क को फिर से जोड़ने के लिए भारत ने 12 सितंबर 2026 को 70 मीटर लंबे बेली ब्रिज के घटकों की पहली खेप भेजी। यह सामग्री हेटौड़ा में नेपाल की रोड डिवीजन को सौंपी गई, जहां से इसे नुवाकोट जिले के बेट्रावती क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा।

बाढ़ के बाद राहत और बहाली की जरूरत

26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने बेट्रावती क्षेत्र में आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया था। यह बाढ़ हिमनदीय घटना से जुड़ी थी, जो नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई और भोटे कोशी-त्रिशूली नदी तंत्र पर असर पड़ा। पहाड़ी इलाकों में सड़कें और पुल बह जाने के बाद अस्थायी ढांचों की जरूरत तेजी से बढ़ जाती है, ताकि स्थानीय लोगों, राहत दलों और जरूरी सामान की आवाजाही फिर शुरू हो सके।

बेली ब्रिज क्यों अहम है

बेली ब्रिज एक पूर्वनिर्मित, मॉड्यूलर स्टील पुल प्रणाली है, जिसे आपातकालीन और सैन्य परिस्थितियों में तेजी से लगाया जा सकता है। इसका विकास द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था और इसे कई परिस्थितियों में भारी मशीनरी के बिना भी जोड़ा जा सकता है। इसी वजह से यह बाढ़, भूस्खलन या सड़क टूटने जैसी स्थितियों में अस्थायी संपर्क बहाल करने का भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।

नेपाल जैसे पर्वतीय देश में, जहां नदी घाटियां और ऊबड़-खाबड़ भूभाग परिवहन को संवेदनशील बनाते हैं, ऐसे पुल राहत और पुनर्वास कार्यों में बेहद उपयोगी साबित होते हैं। बेट्रावती में बेली ब्रिज की स्थापना से स्थानीय आवागमन के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला भी सामान्य होने की उम्मीद है।

भारत-नेपाल राहत सहयोग का व्यापक स्वरूप

यह सहायता केवल पुल सामग्री तक सीमित नहीं है। भारत की ओर से नेपाल को 130 टन से अधिक राहत सामग्री, 54 विशेषज्ञ कर्मी, और खोज-बचाव तथा फॉरेंसिक कार्यों के लिए विशेष उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। भारतीय वायुसेना ने अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाइयों को पहुंचाने के लिए कम से कम आठ विशेष उड़ानें भी संचालित की हैं।

भारत और नेपाल के बीच आपदा-प्रबंधन सहयोग लंबे समय से जारी है। दोनों देशों की खुली सीमा और भौगोलिक निकटता के कारण प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित सहायता, रसद समर्थन और तकनीकी सहयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बेली ब्रिज एक पोर्टेबल स्टील ट्रस ब्रिज होता है, जिसका उपयोग अस्थायी या आपातकालीन सड़क संपर्क बहाल करने में किया जाता है।
  • इस तकनीक का विकास द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था।
  • नुवाकोट जिला नेपाल के मध्य भाग में स्थित है और काठमांडू घाटी के उत्तर-पश्चिम में आता है।
  • भोटे कोशी और त्रिशूली नेपाल की हिमालयी नदी प्रणाली का हिस्सा हैं।

नेपाल में बाढ़ के बाद बेली ब्रिज की तैनाती यह दिखाती है कि आपदा के बाद त्वरित ढांचागत सहायता कितनी अहम होती है। भारत-नेपाल सहयोग का यह कदम राहत, पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय संपर्क बहाली की दिशा में एक व्यावहारिक पहल है।

Originally written on September 15, 2026 and last modified on September 15, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *