तकनीक और खनिजों पर नियंत्रण की राजनीति से बढ़ी वैश्विक चिंता
नई दिल्ली में 14 सितंबर 2026 को हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स के हथियारीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक, खनिज प्रसंस्करण और आपूर्ति शृंखलाओं तक समान पहुंच साझा समृद्धि, वैश्विक लचीलापन और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग के लिए जरूरी है।
ब्रिक्स मंच पर भारत का संदेश
प्रधानमंत्री ने यह रेखांकित किया कि जब तकनीक या जरूरी खनिज कुछ देशों के नियंत्रण में सिमट जाते हैं, तो इसका असर विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। उनके अनुसार, वैश्विक दक्षिण के लिए यह मुद्दा केवल व्यापार का नहीं, बल्कि विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भी है।
ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी समूह है, जिसमें उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसकी शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी, और बाद में संयुक्त अरब अमीरात तथा ईरान जैसे नए सदस्य भी जुड़े।
क्रिटिकल मिनरल्स क्यों अहम हैं
क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं जो ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन और उन्नत विनिर्माण के लिए जरूरी होते हैं। बैटरी, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और आधुनिक रक्षा तकनीकों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
इन खनिजों को लेकर वैश्विक चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि चीन कई चरणों में खनिज प्रसंस्करण पर मजबूत पकड़ रखता है और कुछ मामलों में निर्यात प्रतिबंधों का सहारा ले चुका है। इसी पृष्ठभूमि में ब्रिक्स देशों ने भरोसेमंद, विविध, लचीली और न्यायसंगत आपूर्ति शृंखलाओं पर जोर दिया है।
नई दिल्ली घोषणा और सहयोग के नए क्षेत्र
13 सितंबर 2026 को जारी नई दिल्ली घोषणा में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित, विविध और लचीला बनाने की बात कही गई। इसमें यह भी जोड़ा गया कि खनिज सहयोग से संसाधन-समृद्ध देशों को लाभ साझा करने और आर्थिक विविधीकरण का अवसर मिलना चाहिए।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के चार प्रमुख स्तंभ—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता—के तहत स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स, स्टार्टअप और डिजिटल कृषि से जुड़े कई कदम सामने आए। इनमें ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क शामिल है, जिसका उद्देश्य आपूर्ति शृंखलाओं की विश्वसनीयता और मजबूती बढ़ाना है।
स्टार्टअप सहयोग के लिए ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि सदस्य देशों के नवाचार तंत्र आपस में जुड़ सकें।
तकनीक, एआई और वैश्विक दक्षिण
मोदी ने तकनीक के समावेशी उपयोग पर बल देते हुए कहा कि वैश्विक संघर्षों का बोझ आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तकनीक और खनिजों तक असमान पहुंच विकास के अवसरों को प्रभावित कर सकती है।
इसी सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक दक्षिण के लिए ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सप्लाई चेन सहयोग और एकीकृत बाजार की भी वकालत की।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी।
- क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग बैटरी, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा तकनीकों में होता है।
- नई दिल्ली घोषणा 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान जारी की गई थी।
- ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क का उद्देश्य आपूर्ति शृंखलाओं की विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ाना है।
यह सम्मेलन दिखाता है कि आने वाले समय में तकनीक, खनिज और आपूर्ति शृंखलाएं केवल आर्थिक मुद्दे नहीं रहेंगी, बल्कि वैश्विक कूटनीति और विकास रणनीति के केंद्र में रहेंगी।