नासा का रोमन टेलीस्कोप अंतरिक्ष में नई खोजों की राह पर
नासा ने 30 अगस्त 2026 को नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। यह मिशन स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट से लॉन्च हुआ और अब यह लगभग 1.5 करोड़ किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु-2, यानी L2 की ओर तीन महीने की यात्रा पर है। यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड के उन सवालों की पड़ताल करेगा जिनका संबंध डार्क एनर्जी, डार्क मैटर और एक्सोप्लैनेट्स से है।
क्या है नैंसी ग्रेस रोमन टेलीस्कोप
नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप एक अंतरिक्ष वेधशाला है, जिसकी प्राथमिक मिशन अवधि पांच वर्ष तय की गई है। इसमें 2.4 मीटर का मुख्य दर्पण है और इसका दृश्य क्षेत्र हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में लगभग 100 गुना बड़ा बताया गया है। इसी वजह से यह एक बार में आकाश के बड़े हिस्से का अध्ययन कर सकेगा और खगोलीय सर्वेक्षणों में नई गति ला सकता है।
लॉन्च के 31 मिनट बाद टेलीस्कोप रॉकेट के ऊपरी चरण से अलग हो गया। इसके बाद इसके सोलर ऐरे तैनात किए गए, जो अंतरिक्ष यान को बिजली उपलब्ध कराते हैं। 31 अगस्त 2026 तक मिशन वैज्ञानिक इसके 90 दिन के कमीशनिंग और कैलिब्रेशन चरण की शुरुआत कर चुके थे, जिसमें उपकरणों की जांच और उन्हें वैज्ञानिक उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
L2 कक्षा क्यों अहम है
सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु-2, या L2, सूर्य और पृथ्वी को जोड़ने वाली रेखा पर पृथ्वी की कक्षा के बाहर स्थित एक स्थिर बिंदु है। यहां तापीय और अवलोकन संबंधी परिस्थितियां अपेक्षाकृत स्थिर रहती हैं, इसलिए कई अंतरिक्ष वेधशालाएं इसी क्षेत्र में भेजी जाती हैं। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी इसी क्षेत्र का उपयोग करता है।
रोमन टेलीस्कोप की यह कक्षा उसे लंबे समय तक बिना बड़े व्यवधान के गहरे अंतरिक्ष का अध्ययन करने में मदद करेगी। यह मिशन न केवल ब्रह्मांड की संरचना को समझने में उपयोगी होगा, बल्कि दूरस्थ ग्रहों की खोज और उनके गुणों के विश्लेषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
तकनीक, इतिहास और परीक्षा के लिए जरूरी तथ्य
इस मिशन से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू इसका हार्डवेयर इतिहास है। टेलीस्कोप का मूल हार्डवेयर पहले एक राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यक्रम के लिए बनाया गया था, जिसे 2012 में नासा को दान कर दिया गया और बाद में खगोल विज्ञान के लिए पुनः उपयोग किया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि यह लॉन्च नासा की तय आधारभूत समयसीमा, यानी मई 2027, से लगभग नौ महीने पहले हुआ।
लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A का भी अपना ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि यहां से अपोलो और स्पेस शटल मिशन भी प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। मिशन का नाम नैंसी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें नासा की पहली चीफ ऑफ एस्ट्रोनॉमी माना जाता है। परियोजना लागत के सार्वजनिक अनुमान लगभग 4 अरब से 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच बताए गए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली चीफ ऑफ एस्ट्रोनॉमी नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है।
- सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु-2, या L2, कई अंतरिक्ष वेधशालाओं के लिए स्थिर पर्यावरण उपलब्ध कराता है।
- हबल स्पेस टेलीस्कोप और रोमन टेलीस्कोप, दोनों के मुख्य दर्पण का व्यास 2.4 मीटर है।
- कैनेडी स्पेस सेंटर का लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A अपोलो और स्पेस शटल कार्यक्रमों से भी जुड़ा रहा है।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप का प्रक्षेपण नासा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह ब्रह्मांड के विस्तार, अदृश्य पदार्थ और नए ग्रहों की खोज जैसे बड़े वैज्ञानिक सवालों को नए डेटा के साथ समझने में मदद करेगा।