नवजात शिशुओं की निगरानी के लिए एआई आधारित प्रणाली

नवजात शिशुओं की निगरानी के लिए एआई आधारित प्रणाली

आंध्र प्रदेश सरकार नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास की निगरानी को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है। इस पहल के तहत वाधवानी एआई फाउंडेशन द्वारा विकसित “शिशु मापन” एप्लिकेशन को आशा कार्यकर्ताओं के मोबाइल ऐप के साथ एकीकृत किया जाएगा। यह तकनीक शिशुओं की वृद्धि और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को डिजिटल रूप से एकत्र करने में मदद करेगी।

एआई आधारित नवजात मापन प्रणाली

नई प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नवजात शिशु के शरीर को छुए बिना केवल मोबाइल फोन के वीडियो के माध्यम से विभिन्न शारीरिक माप लिए जा सकते हैं। यह तकनीक शिशु का वजन, लंबाई, सिर की परिधि, छाती की परिधि और मध्य-ऊपरी भुजा की परिधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी रिकॉर्ड करने में सक्षम है। इस प्रकार की डिजिटल मापन प्रणाली से स्वास्थ्यकर्मियों को तेज, सुरक्षित और अधिक सटीक आंकड़े प्राप्त होंगे, जिससे शिशुओं के पोषण और विकास की बेहतर निगरानी की जा सकेगी।

मंगलगिरि में पायलट परियोजना

इस परियोजना का पायलट परीक्षण आंध्र प्रदेश के Mangalagiri निर्वाचन क्षेत्र में चल रहा है। पायलट परियोजना के अंतर्गत लगभग 1,000 नवजात शिशुओं को शामिल किया गया है। इसमें इंदिरानगर, कोप्पाराव कॉलोनी, काजा और येर्राबलेम के शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ पेडावडलापुडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को भी शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रणाली की प्रभावशीलता और व्यवहारिक उपयोग का परीक्षण किया जा रहा है।

प्रशिक्षण और डेटा संग्रहण

परियोजना के सफल संचालन के लिए आशा कार्यकर्ताओं और सहायक नर्स दाइयों (एएनएम) को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 और 7 जून 2026 को पायलट क्षेत्रों में आयोजित किए गए। पायलट के दौरान एकत्र किए गए वीडियो और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का उपयोग एआई प्रणाली को प्रशिक्षित करने तथा स्थानीय स्तर का स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार करने में किया जाएगा। इससे भविष्य में प्रणाली की सटीकता और उपयोगिता बढ़ेगी।

राज्यव्यापी विस्तार की योजना

सरकार के अनुसार एआई एकीकरण और डेटा प्रशिक्षण की प्रक्रिया लगभग तीन महीने तक चलेगी। इसके बाद परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा और परियोजना को पूरे आंध्र प्रदेश में लागू करने पर विचार किया जाएगा। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है, तो राज्य में नवजात स्वास्थ्य निगरानी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे शुरुआती अवस्था में कुपोषण, विकास संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करना आसान होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक की भूमिका

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल तकनीक और सामुदायिक स्वास्थ्य नेटवर्क के संयोजन से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने की उम्मीद की जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एएसएचए का पूरा नाम “अक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट” है और वे भारत की सामुदायिक स्वास्थ्य प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  • एएनएम अर्थात सहायक नर्स दाई प्राथमिक स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं।
  • सिर की परिधि और मध्य-ऊपरी भुजा की परिधि बच्चों के स्वास्थ्य मूल्यांकन में उपयोग किए जाने वाले महत्वपूर्ण मानवमितीय माप हैं।
  • आंध्र प्रदेश इस तकनीक को राज्यव्यापी स्तर पर लागू करने से पहले पायलट मॉडल के रूप में परीक्षण कर रहा है।

नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एआई आधारित यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे समय पर स्वास्थ्य मूल्यांकन, बेहतर डेटा प्रबंधन और शिशु कल्याण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

Originally written on June 8, 2026 and last modified on June 8, 2026.

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