दूरसंचार नेटवर्क में एआई के लिए जवाबदेही का नया ढाँचा
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार नेटवर्क और सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार उपयोग के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। प्रस्ताव के तहत एआई प्रणालियों से जुड़ी घटनाओं और उनके नतीजों के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाता जवाबदेह होंगे—चाहे एआई प्रणाली उन्होंने स्वयं विकसित की हो या किसी बाहरी कंपनी से ली हो।
बोर्ड स्तर पर नीति और निगरानी
मसौदे में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और अन्य अधिकृत संस्थाओं के लिए बोर्ड से स्वीकृत एआई नीति बनाना प्रस्तावित है। उन्हें एआई शासन और सुरक्षा के लिए विशेष समितियाँ भी गठित करनी होंगी। इसका उद्देश्य एआई के विकास और इस्तेमाल पर संस्थागत निगरानी रखना तथा जोखिमों की पहचान और प्रबंधन करना है।
संस्थाओं को अपने एआई तंत्रों का जोखिम के आधार पर वर्गीकरण करना होगा। इसके लिए नेटवर्क संचालन में उनकी भूमिका, वित्तीय और परिचालन नतीजों पर प्रभाव तथा उपभोक्ताओं को हो सकने वाले नुकसान को ध्यान में रखा जाएगा। प्रणालियों को उच्च, मध्यम या निम्न जोखिम श्रेणी में रखा जा सकेगा।
घटनाओं की रिपोर्टिंग और उपभोक्ता शिकायतें
गंभीर और उच्च प्रभाव वाली एआई घटनाओं की जानकारी ट्राई को निर्धारित प्रारूप और तय समय-सीमा में देनी होगी। सेवा प्रदाताओं को एआई से जुड़ी घटनाओं और उपभोक्ता शिकायतों का केंद्रीय अभिलेख भी रखना होगा। इससे नेटवर्क में आई गड़बड़ी, सुरक्षा खतरे या उपभोक्ता पर पड़े असर की निगरानी में मदद मिल सकती है।
मसौदा साइबर सुरक्षा खतरों, एल्गोरिदम में पक्षपात और दूरसंचार नेटवर्क में प्रणालीगत विफलताओं जैसे जोखिमों को संबोधित करता है। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि एआई आधारित प्रणालियाँ नेटवर्क संचालन और सेवाओं से जुड़े फैसलों में इस्तेमाल हो सकती हैं। ऐसे में गलती या पक्षपात का असर केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रहकर उपभोक्ताओं तक पहुँच सकता है।
राष्ट्रीय एआई दिशा-निर्देशों से तालमेल
ट्राई का प्रस्ताव फरवरी 2026 में जारी भारत सरकार के एआई शासन दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। उन दिशा-निर्देशों में सात मूल सिद्धांत बताए गए हैं: विश्वास, व्यक्ति-प्रथम दृष्टिकोण, नवाचार, निष्पक्षता, जवाबदेही, समझने योग्य व्यवस्था और सुरक्षा। ट्राई के मसौदे पर हितधारक 27 नवंबर 2026 तक लिखित सुझाव दे सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- दूरसंचार नेटवर्क में डेटा, नियंत्रण और प्रबंधन—तीन अलग-अलग कार्यात्मक स्तर होते हैं।
- डेटा स्तर उपयोगकर्ता की सामग्री, नियंत्रण स्तर संकेतों और प्रबंधन स्तर संचालन तथा प्रशासन से जुड़े संदेशों को संभालता है।
- एआई शासन में यह देखना शामिल है कि जवाबदेह कौन है, किस व्यवस्था पर निगरानी है, निगरानी कब होगी और उसे कैसे लागू किया जाएगा।
- भारत सरकार के एआई शासन दिशा-निर्देशों में सात सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं, जिनमें निष्पक्षता, जवाबदेही और सुरक्षा शामिल हैं।
मसौदा अभी सुझाव के लिए खुला है; अंतिम नियम हितधारकों की प्रतिक्रिया के बाद तय होंगे। इसका केंद्र दूरसंचार क्षेत्र में एआई के उपयोग के साथ स्पष्ट जवाबदेही और जोखिम नियंत्रण स्थापित करना है।