आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ पर नए नियम

आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ पर नए नियम

केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 से औषधि (तेरहवां संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। इसके तहत औषधि नियम, 1945 के नियम 31 में बदलाव किया गया है, जो दवाओं के आयात से संबंधित है। नए प्रावधान आयात के समय दवाओं की बची हुई उपयोग-अवधि के लिए अलग मानक तय करते हैं।

अधिकांश दवाओं के लिए 12 महीने की शर्त

नए नियम के अनुसार, भारत में दवा आयात की अनुमति देने वाले प्राधिकरण ऐसी अधिकांश दवाओं के आयात को मंजूरी नहीं दे सकेंगे, जिनकी आयात की तारीख पर शेल्फ लाइफ 12 महीने से कम बची हो। शेल्फ लाइफ से आशय उस अवधि से है, जिसमें निर्धारित भंडारण और वितरण स्थितियों में उत्पाद उपयोग के लिए स्वीकार्य बना रहता है।

इससे पहले नियम में दवा की स्वीकृत शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शेष रहने की शर्त थी। नए मानक में शेष अवधि को सीधे महीनों में तय किया गया है। इससे आयात के समय पात्रता का आकलन एक समान आधार पर किया जा सकेगा।

जैविक दवाओं के लिए अलग मानदंड

जैविक दवाओं और रेडियोऔषधियों के लिए सामान्य नियम से अलग छूट रखी गई है। इन दवाओं का आयात तब किया जा सकता है, जब लेबल पर दी गई कुल शेल्फ लाइफ का कम-से-कम 60 प्रतिशत हिस्सा शेष हो। इस तरह उनकी प्रकृति के अनुरूप अलग सीमा निर्धारित की गई है।

दवा की समाप्ति तिथि वह तारीख होती है, जिसके अंत तक निर्माता उसकी पूरी प्रभावकारिता और सुरक्षा की गारंटी देता है। इसलिए आयात के समय पर्याप्त उपयोग-अवधि सुनिश्चित करना दवा की गुणवत्ता बनाए रखने और समय से पहले अनुपयोगी होने की आशंका घटाने के लिए महत्वपूर्ण है।

परामर्श के बाद लागू हुआ संशोधन

संशोधन का मसौदा 22 जून 2026 को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया था। इस दौरान आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए। अंतिम नियम औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श और जनता से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद लागू किए गए।

सरकार के अनुसार, बदलाव का उद्देश्य दवा आयात को आसान बनाना, नियमन को सरल करना और आपूर्ति-श्रृंखला की दक्षता बढ़ाना है। साथ ही, आयातित दवाओं में पर्याप्त उपयोग-अवधि बची रहने से उनके बर्बाद होने की आशंका कम हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • औषधि नियम, 1945 का नियम 31 दवाओं के आयात से संबंधित है।
  • अधिकांश आयातित दवाओं के लिए नए नियम में कम-से-कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ जरूरी है।
  • जैविक दवाओं और रेडियोऔषधियों के लिए लेबल की गई शेल्फ लाइफ का कम-से-कम 60 प्रतिशत शेष होना चाहिए।
  • जैव-औषधियां जैविक स्रोतों से बनाई, निकाली या अर्ध-संश्लेषित की जा सकती हैं।

नए नियम आयातित दवाओं की उपयोग-अवधि को लेकर स्पष्ट मानक बनाते हैं। इनका उद्देश्य नियामकीय प्रक्रिया को सरल रखते हुए मरीजों तक पर्याप्त अवधि वाली दवाएं पहुंचाना है।

Originally written on October 31, 2026 and last modified on October 31, 2026.

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