गीग और मंच-आधारित कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गठित
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को असंगठित क्षेत्र के कामगारों तथा गीग और मंच-आधारित कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बना यह बोर्ड इन कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा बनाने, उनकी निगरानी करने और केंद्र सरकार को सुझाव देने का काम करेगा। संहिता 21 नवंबर 2025 से लागू है।
केंद्र, राज्य, कंपनियों और कामगार संगठनों की भागीदारी
बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे। इसकी संरचना में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों तथा गीग और मंच-आधारित कामगारों के संगठनों को शामिल किया गया है। राज्यों की ओर से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व होगा।
एग्रीगेटर पक्ष से इटर्नल समूह, स्विगी, जेप्टो, अर्बन कंपनी और रैपिडो के प्रतिनिधि शामिल हैं। कामगारों और श्रमिक संगठनों की ओर से इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स, भारतीय मजदूर संघ, नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स और ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस व्यापक भागीदारी का उद्देश्य नीति-निर्माण में सरकार, सेवा प्रदाताओं और कामगारों के दृष्टिकोण को शामिल करना है।
कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी और सलाह
बोर्ड असंगठित क्षेत्र, गीग और मंच-आधारित कामगारों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने, उन पर नजर रखने और उनकी सिफारिश करने में भूमिका निभाएगा। यह सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन से जुड़े विषयों पर केंद्र सरकार को सलाह देगा तथा केंद्र की सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करेगा।
इसके अलावा, बोर्ड राज्यों में कामगारों से संबंधित अभिलेख रखने की व्यवस्था की समीक्षा करेगा और संबंधित निधि तथा खाते से हुए व्यय की जांच करेगा। उसे वर्ष में कम-से-कम तीन बार बैठक करनी होगी। केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार उसे अन्य कार्य भी सौंप सकती है। ये जिम्मेदारियां योजनाओं के क्रियान्वयन और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग पर नियमित निगरानी का ढांचा बनाती हैं।
सामाजिक सुरक्षा संहिता का दायरा
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नौ केंद्रीय श्रम कानूनों को एक समेकित कानूनी ढांचे में शामिल किया है। इसके तहत असंगठित, गीग और मंच-आधारित कामगारों के लिए जीवन और दिव्यांगता बीमा, स्वास्थ्य तथा मातृत्व लाभ, भविष्य निधि से जुड़े लाभ, पेंशन और कौशल उन्नयन जैसी योजनाओं का प्रावधान है।
संहिता में एग्रीगेटर से उसके वार्षिक कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत योगदान अपेक्षित है। हालांकि, यह राशि गीग और मंच-आधारित कामगारों को किए गए या देय भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। संहिता गीग कार्य को पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर किए जाने वाले काम के रूप में और मंच-आधारित कार्य को भुगतान के लिए ऑनलाइन मंच के माध्यम से किए जाने वाले काम के रूप में अलग-अलग परिभाषित करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नौ केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित किया है।
- यह संहिता 21 नवंबर 2025 से लागू हुई।
- गीग कार्य में पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध आवश्यक नहीं होता, जबकि मंच-आधारित कार्य ऑनलाइन मंच के जरिए भुगतान से जुड़ा होता है।
- एग्रीगेटर का योगदान कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत है और इसकी अधिकतम सीमा कामगारों को किए गए या देय भुगतान का 5 प्रतिशत है।
नए बोर्ड के जरिए गीग और मंच-आधारित कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर नीति-सलाह, निगरानी और केंद्र-राज्य समन्वय को संस्थागत रूप दिया गया है।