त्रिपुरा में रुनिएल देबबर्मा बने टीटीएएडीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य

त्रिपुरा में रुनिएल देबबर्मा बने टीटीएएडीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य

त्रिपुरा में रुनिएल देबबर्मा को त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) का मुख्य कार्यकारी सदस्य नियुक्त किया गया है। यह पद राज्य के जनजातीय बहुल क्षेत्रों के प्रशासन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी नियुक्ति से परिषद के कार्यों में नई दिशा और गति आने की उम्मीद की जा रही है।

टीटीएएडीसी का गठन और भूमिका

त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का गठन भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत किया गया है। यह परिषद त्रिपुरा के जनजातीय बहुल क्षेत्रों का प्रशासन संचालित करती है। इसके अंतर्गत भूमि प्रबंधन, वन संसाधन, स्थानीय परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर अधिकार प्रदान किए गए हैं। परिषद स्थानीय स्तर पर शासन को सशक्त बनाती है और जनजातीय समुदायों के हितों की रक्षा करती है।

मुख्य कार्यकारी सदस्य की जिम्मेदारियां

मुख्य कार्यकारी सदस्य परिषद की कार्यकारी समिति का प्रमुख होता है। यह पद किसी स्थानीय प्रशासनिक प्रमुख के समान होता है, जो परिषद के निर्णयों को लागू करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और विकास योजनाओं को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी निभाता है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति परिषद के प्रशासनिक ढांचे को प्रभावी ढंग से संचालित करता है।

छठी अनुसूची का महत्व

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची उत्तर-पूर्व भारत के जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान प्रदान करती है। यह असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के कुछ क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों की स्थापना की अनुमति देती है। इन परिषदों को भूमि, वन, सामाजिक रीति-रिवाज, गांव प्रशासन और स्थानीय विवाद निपटान जैसे विषयों पर कानून बनाने और नियम निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल छठी अनुसूची के अंतर्गत कार्य करती है।
  • छठी अनुसूची चार राज्यों—असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम—के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है।
  • मुख्य कार्यकारी सदस्य स्वायत्त जिला परिषद की कार्यकारी समिति का प्रमुख होता है।
  • स्वायत्त जिला परिषदों को भूमि, वन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े विषयों पर अधिकार प्राप्त होते हैं।

रुनिएल देबबर्मा की नियुक्ति त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। यह कदम स्थानीय शासन को मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को गति देने में सहायक साबित हो सकता है।

Originally written on May 6, 2026 and last modified on May 6, 2026.

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