तेलंगाना का गोल्लाला गुडी मंदिर राष्ट्रीय धरोहर सूची में शामिल
तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव स्थित गोल्लालागुडी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की 1 सितंबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना के बाद यह मंदिर भारत की संरक्षित धरोहर सूची में शामिल हो गया। इस फैसले से तेलंगाना में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण वाले स्मारकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
क्यों अहम है यह दर्जा
किसी स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने का अर्थ है कि वह अब प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित होगा। ऐसे स्थलों की देखरेख, संरक्षण और नियंत्रित सार्वजनिक पहुंच की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की होती है। यह दर्जा केवल कानूनी सुरक्षा नहीं देता, बल्कि ऐतिहासिक संरचनाओं के वैज्ञानिक संरक्षण का रास्ता भी खोलता है।
गोल्लालागुडी की स्थापत्य विशेषताएं
गोल्लालागुडी मंदिर को त्रिकुटालय शैली का मंदिर माना जाता है, यानी इसमें तीन गर्भगृह हैं। इसका पूर्वमुखी मंडप तीन गर्भगृहों से जुड़ा हुआ है, जो तेलंगाना की काकतीयकालीन मंदिर स्थापत्य परंपरा की एक विशिष्ट पहचान मानी जाती है।
यह मंदिर व्यापक रूप से 12वीं से 13वीं शताब्दी ईस्वी के काकतीय काल से संबद्ध माना जाता है, हालांकि इसकी सटीक निर्माण तिथि और मूल समर्पण को लेकर अभी भी पुरातात्त्विक और अभिलेखीय अध्ययन जारी हैं। यही कारण है कि यह स्थल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि शोध की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
संरक्षण और आगे की योजना
ASI के हैदराबाद मंडल ने कहा है कि वह इस स्थल पर संरक्षण कार्य और छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा। प्रस्तावित कामों में जलभराव की समस्या को दूर करना और आगंतुकों के लिए उचित पथ का निर्माण शामिल है। इससे मंदिर परिसर की संरचना सुरक्षित रहेगी और श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के लिए पहुंच भी बेहतर होगी।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से पहले 7 मार्च 2026 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। इसमें गोल्लालागुडी और पास के एक शिव मंदिर को शामिल किया गया था। इसके बाद सार्वजनिक आपत्तियों और सुझावों के लिए दो महीने का समय दिया गया था, जो इस प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत होता है।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करता है।
- त्रिकुटालय मंदिर वह होता है जिसमें तीन गर्भगृह होते हैं।
- काकतीय स्थापत्य तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से जुड़ी प्रमुख मंदिर-परंपरा है; रामप्पा मंदिर इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
गोल्लालागुडी मंदिर को मिला यह दर्जा तेलंगाना की समृद्ध स्थापत्य विरासत को राष्ट्रीय पहचान देता है। साथ ही, यह कदम इस क्षेत्र के ऐतिहासिक मंदिरों के संरक्षण और अध्ययन को नई गति देने वाला माना जा रहा है।