तमिलनाडु ने स्थापित किए पांच समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र

तमिलनाडु ने स्थापित किए पांच समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र

तमिलनाडु सरकार ने 19 जून 2026 को राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के बेहतर प्रबंधन और विस्तार के लिए पांच समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों (Renewable Energy Zones) को मंजूरी दी। इन क्षेत्रों का गठन तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रशासन, समन्वय और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना है। राज्य सरकार का यह कदम तमिलनाडु को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन नए क्षेत्रों के मुख्यालय चेन्नई, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, कोयंबटूर और मदुरै में स्थापित किए गए हैं।

पांच नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों का क्षेत्रीय दायरा

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक क्षेत्र को विशेष बिजली वितरण सर्किलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चेन्नई क्षेत्र के अंतर्गत चेन्नई, कांचीपुरम, वेल्लोर और तिरुवन्नामलाई वितरण सर्किल शामिल किए गए हैं। तिरुचिरापल्ली क्षेत्र तिरुचिरापल्ली, विलुप्पुरम और तंजावुर सर्किलों की देखरेख करेगा। तिरुनेलवेली और कोयंबटूर क्षेत्र अपने-अपने वितरण सर्किलों का प्रबंधन करेंगे, जबकि मदुरै क्षेत्र को करूर, इरोड और मदुरै वितरण सर्किलों की जिम्मेदारी दी गई है। यह क्षेत्रीय मॉडल परियोजनाओं के संचालन को अधिक संगठित और दक्ष बनाने में सहायक होगा।

प्रशासनिक संरचना और प्रमुख कार्य

इन क्षेत्रों में परियोजनाओं के प्रशासन और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सहायक कार्यकारी अभियंताओं को सौंपी गई है। उनका कार्य परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय तथा विद्युत निकासी अवसंरचना के विकास को सुनिश्चित करना होगा। यह व्यवस्था नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों को कम करने और परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन में सहायता करेगी। साथ ही यह पवन ऊर्जा क्षेत्र में रिपावरिंग गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।

पवन ऊर्जा रिपावरिंग और नई तकनीकों को प्रोत्साहन

रिपावरिंग का अर्थ पुराने पवन टर्बाइनों को हटाकर उनकी जगह अधिक आधुनिक और दक्ष टर्बाइनों की स्थापना करना है। इससे कम भूमि और समान संसाधनों का उपयोग करके अधिक बिजली उत्पादन संभव हो पाता है। नई ऊर्जा क्षेत्रीय व्यवस्था बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, पीएम-कुसुम 2.0, पीएम रूफटॉप सोलर और फ्लोटिंग सोलर जैसी योजनाओं को भी समर्थन प्रदान करेगी। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को संग्रहीत कर बाद में उपयोग करने में मदद करती है, जबकि फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं जलाशयों और झीलों की सतह पर स्थापित की जाती हैं।

हरित ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

तमिलनाडु लंबे समय से भारत के प्रमुख पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार का यह निर्णय न केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार को गति देगा, बल्कि बिजली उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा। बेहतर प्रशासनिक ढांचे और क्षेत्रीय समन्वय के माध्यम से राज्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने तथा हरित ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तमिलनाडु भारत के प्रमुख पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों में से एक है।
  • पीएम-कुसुम का पूरा नाम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है।
  • बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित आपूर्ति को संतुलित करने के लिए किया जाता है।
  • फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं आमतौर पर जलाशयों, झीलों और अन्य जल निकायों पर स्थापित की जाती हैं।

तमिलनाडु द्वारा पांच समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों की स्थापना राज्य की हरित ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पहल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के कुशल प्रबंधन, निवेश वृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगी।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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