टेरिटोरियल आर्मी: नागरिक जीवन के साथ देश सेवा की मजबूत मिसाल
टेरिटोरियल आर्मी (टीए) भारत की ऐसी रिजर्व सैन्य शक्ति है, जो नागरिक पेशे और सैन्य सेवा को साथ लेकर चलती है। नई दिल्ली में 6 अगस्त 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में इस बल के दायरे, उपलब्धियों और भविष्य की मजबूती पर चर्चा की गई। यह चर्चा इसलिए अहम है क्योंकि आपदा, आंतरिक सुरक्षा और आपात स्थितियों में टीए की भूमिका लगातार बढ़ती गई है।
नागरिक-सैनिक मॉडल क्या है
टेरिटोरियल आर्मी को अक्सर “सिटिजन-सोल्जर” फोर्स कहा जाता है। इसका मतलब है कि इसके सदस्य सामान्य नागरिक जीवन में अपने पेशे जारी रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य सेवा के लिए उपलब्ध रहते हैं। यह बल रक्षा मंत्रालय के अधीन अंशकालिक सैन्य व्यवस्था के रूप में काम करता है और राष्ट्रीय आपातकाल, आंतरिक सुरक्षा तथा सहायक अभियानों में तैनात किया जा सकता है।
वर्तमान में टीए में लगभग 44,400 कर्मी और 59 इकाइयाँ हैं। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि यह प्रशिक्षित मानव संसाधन का ऐसा भंडार उपलब्ध कराती है, जिसे तेजी से जुटाया जा सकता है।
आपदा राहत और आंतरिक सुरक्षा में उपयोग
टेरिटोरियल आर्मी का इस्तेमाल कई बार देश में राहत और बचाव कार्यों में किया गया है। केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात और असम की बाढ़ जैसी स्थितियों में इसके कर्मियों ने राहत, बचाव और चिकित्सा सहायता में योगदान दिया।
इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर यह बल आंतरिक सुरक्षा और सीमा से जुड़े सहायक कार्यों में भी मदद करता है। इसकी संरचना ऐसी है कि प्रशिक्षित लोग अपनी नागरिक नौकरी छोड़े बिना देश की सेवा के लिए तैयार रह सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण में भी भूमिका
टीए की इकाइयों में शामिल इकोलॉजिकल टास्क फोर्स पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण कार्यों के लिए जानी जाती हैं। राजनाथ सिंह ने बताया कि इन इकाइयों ने लगभग 10 करोड़ पौधे लगाए हैं और इनमें 80% से 85% तक जीवित रहने की दर दर्ज की गई है।
ये इकाइयाँ संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में पौधारोपण, संरक्षण और पर्यावरण पुनर्स्थापन जैसे कार्य करती हैं। इन्हें मिशन LiFE और पंचामृत जैसी भारत की जलवायु एवं पर्यावरण प्रतिबद्धताओं से भी जोड़ा जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टेरिटोरियल आर्मी भारत की रिजर्व फोर्स है, जिसमें नागरिक जीवन के साथ सैन्य सेवा का मॉडल अपनाया जाता है।
- इसे “सिटिजन-सोल्जर” फोर्स कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य सामान्य नौकरी के साथ देश सेवा करते हैं।
- इकोलॉजिकल टास्क फोर्स का काम मुख्य रूप से वृक्षारोपण, संरक्षण और पर्यावरण पुनर्स्थापन है।
- रिजर्व फोर्सें युद्ध, आपदा और सुरक्षा संकट के समय अतिरिक्त मानवबल उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
कुल मिलाकर, टेरिटोरियल आर्मी भारत की रक्षा तैयारियों और नागरिक सहायता ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बल दिखाता है कि देश सेवा केवल पूर्णकालिक सैन्य जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारियों के साथ भी प्रभावी ढंग से निभाई जा सकती है।