जैव विविधता से कमाई का नया रिकॉर्ड, NBA ने ABS में पार किया 200 करोड़

जैव विविधता से कमाई का नया रिकॉर्ड, NBA ने ABS में पार किया 200 करोड़

भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 5 सितंबर 2026 को Access and Benefit-Sharing यानी ABS के तहत कुल 200 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। यह व्यवस्था जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभ को साझा करने से जुड़ी है।

ABS व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण है

जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत ABS का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधों, बीजों, फसलों और अन्य जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ का एक हिस्सा संबंधित हितधारकों तक पहुंचे। राष्ट्रीय स्तर पर NBA इस व्यवस्था को लागू करता है, जबकि राज्य जैव विविधता बोर्ड और जैव विविधता प्रबंधन समितियां राज्य और स्थानीय स्तर पर काम करती हैं।

यह प्रणाली खास तौर पर तब अहम हो जाती है जब किसी जैविक संसाधन का उपयोग शोध, प्रजनन, बीज विकास या व्यावसायिक उत्पादन में किया जाता है। इससे जैव विविधता संरक्षण और उसके सतत उपयोग को बढ़ावा मिलता है।

ताजा वितरण में किन राज्यों को कितना मिला

5 सितंबर 2026 को NBA ने 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को 8.23 करोड़ रुपये मंजूर किए। यह राशि कुछ वाणिज्यिक बीज कंपनियों से वसूली गई थी, जिनमें Nunhems India Pvt. Ltd., East West Seeds India Pvt. Ltd. और Bayer Science and Innovation Pvt. Ltd. शामिल हैं। इन कंपनियों ने करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज जैसी फसलों के शोध और व्यावसायिक उपयोग के लिए यह भुगतान किया।

क्योंकि इन जैविक संसाधनों की खरीद खुले बाजार से हुई थी और उन्हें किसी विशिष्ट समुदाय से जोड़कर ट्रेस नहीं किया जा सका, इसलिए NBA ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के फसल क्षेत्रफल आंकड़ों के आधार पर राशि का बंटवारा किया। इस दौर में मध्य प्रदेश को 1.17 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 1.01 करोड़ रुपये मिले। आंध्र प्रदेश को 75.55 लाख रुपये, कर्नाटक को 65.23 लाख रुपये, गुजरात को 64.06 लाख रुपये और ओडिशा को 57.63 लाख रुपये आवंटित किए गए। बाकी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शेष 1.83 करोड़ रुपये बांटे गए।

लगातार बढ़ रहा ABS का दायरा

यह उपलब्धि अचानक नहीं आई है। 30 अगस्त 2026 को भी NBA ने भिंडी, खीरा और तरबूज से जुड़े संसाधनों के उपयोग पर 5.68 करोड़ रुपये का वितरण किया था। उस भुगतान के बाद कुल ABS राशि 191 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई थी। इसके बाद 8.23 करोड़ रुपये की नई मंजूरी के साथ यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपये के पार चला गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी।
  • ABS का पूरा नाम Access and Benefit-Sharing है, जिसका संबंध जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से है।
  • राज्य जैव विविधता बोर्ड राज्य स्तर पर और जैव विविधता प्रबंधन समितियां स्थानीय निकाय स्तर पर काम करती हैं।
  • इस ताजा वितरण में राशि का आधार कृषि मंत्रालय द्वारा प्रकाशित फसल क्षेत्रफल डेटा रहा।

NBA की यह उपलब्धि भारत में जैव संसाधनों के संरक्षण, उनके न्यायसंगत उपयोग और लाभ-साझेदारी की व्यवस्था को मजबूत करती है। आने वाले समय में ABS तंत्र जैव विविधता आधारित शोध और कृषि नवाचार के लिए और अधिक महत्वपूर्ण होता जाएगा।

Originally written on September 7, 2026 and last modified on September 7, 2026.

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