अंडमान में परमाणु ऊर्जा की संभावनाएं, दूरदराज़ इलाकों के लिए नई रणनीति

अंडमान में परमाणु ऊर्जा की संभावनाएं, दूरदराज़ इलाकों के लिए नई रणनीति

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में बिजली आपूर्ति के लिए परमाणु ऊर्जा के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों यानी एसएमआर की संभावना पर विचार तेज हुआ है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने 4 से 8 सितंबर 2026 के बीच द्वीपसमूह के तीनों जिलों में संभावित स्थलों का आकलन किया। इस पहल का उद्देश्य ऐसे दूरस्थ क्षेत्र के लिए भरोसेमंद ऊर्जा विकल्प तलाशना है, जहां अभी बिजली उत्पादन मुख्य रूप से डीजल जनरेटर सेटों पर निर्भर है।

दूरस्थ द्वीपों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सवाल

अंडमान और निकोबार में कोई पारंपरिक बिजली संयंत्र नहीं है। यहां डीजल से बिजली बनाई जाती है और ईंधन मुख्यभूमि भारत से लाया जाता है, जिससे लागत और आपूर्ति दोनों पर दबाव रहता है। इसी वजह से सरकार और वैज्ञानिक संस्थान ऐसे विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं जो लंबे समय तक स्थिर, कम-निर्भर और रणनीतिक रूप से उपयोगी हों।

एसएमआर को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। ये छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें मॉड्यूलर ढंग से तैयार किया जाता है। इनकी खासियत यह है कि इन्हें उन जगहों पर लगाया जा सकता है, जहां बड़े पारंपरिक बिजली संयंत्र स्थापित करना व्यावहारिक नहीं होता।

एसएमआर क्यों महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं

भारत की ऊर्जा नीति में एसएमआर को केवल बिजली उत्पादन के साधन के रूप में नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों की ऊर्जा जरूरतों, रणनीतिक ढांचे और दीर्घकालिक योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। अंडमान जैसे द्वीपों में यह मॉडल इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां ऊर्जा ढांचे को समुद्री परिवहन, ईंधन आपूर्ति और मौसम जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ता है।

इससे पहले एलएनजी री-गैसीफिकेशन प्लांट और भू-तापीय परियोजनाओं जैसे विकल्पों पर भी विचार हुआ था, लेकिन वे संचालन की दृष्टि से व्यवहार्य नहीं बन पाए। ऐसे में परमाणु ऊर्जा का विकल्प फिर चर्चा में आया है।

ग्रेट निकोबार परियोजना और रणनीतिक महत्व

यह ऊर्जा पहल ग्रेट निकोबार परियोजना की बढ़ती बिजली मांग से भी जुड़ी है। इस परियोजना में गलाथिया बे में एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल शामिल है। इन ढांचागत परियोजनाओं के लिए स्थिर और बड़े पैमाने की बिजली आपूर्ति जरूरी होगी।

अंडमान और निकोबार की भौगोलिक स्थिति भी इस योजना को रणनीतिक महत्व देती है। यह द्वीपसमूह मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जो हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसलिए यहां ऊर्जा अवसंरचना का विकास केवल स्थानीय जरूरत नहीं, बल्कि व्यापक समुद्री और सुरक्षा दृष्टि से भी अहम माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है और इसमें तीन जिले हैं।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत भारत का प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थान है।
  • छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोगी माने जाते हैं।
  • मलक्का जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्ग है।

कुल मिलाकर, अंडमान में एसएमआर की संभावना भारत की ऊर्जा नीति, रणनीतिक अवसंरचना और दूरस्थ क्षेत्रों की जरूरतों को एक साथ जोड़ती है। अब देखना यह होगा कि स्थल-आकलन के बाद इस दिशा में आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Originally written on September 7, 2026 and last modified on September 7, 2026.

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