चंडीगढ़ बैठक से मजबूत हुई भारत की जैव विविधता शासन व्यवस्था
चंडीगढ़ में 6 से 7 सितंबर 2026 तक राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से हुई इस बैठक में देश में जैव विविधता के संरक्षण, स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन और संस्थागत समन्वय से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जैव विविधता शासन की तीन-स्तरीय व्यवस्था
भारत में जैव विविधता प्रबंधन के लिए एक तीन-स्तरीय ढांचा काम करता है। इसके शीर्ष पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण है, जो जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत गठित एक वैधानिक संस्था है। राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड और केंद्रशासित प्रदेशों में जैव विविधता परिषदें कार्य करती हैं। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां इस व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी हैं।
यह ढांचा केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और उनसे जुड़े लाभों के न्यायसंगत बंटवारे को भी कवर करता है। इसी कारण यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समुदायों के अधिकारों और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा से भी जुड़ती है।
कानूनी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय दायित्व
भारत में जैव विविधता शासन का मौजूदा कानूनी आधार जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 और जैविक विविधता नियम, 2024 हैं। इन प्रावधानों का संबंध जैविक संसाधनों तक पहुंच, लाभ-साझेदारी और अनुपालन तंत्र से है।
भारत जैव विविधता पर कन्वेंशन और नागोया प्रोटोकॉल, दोनों का पक्षकार है। जैव विविधता पर कन्वेंशन 1992 में अपनाया गया और 1993 में लागू हुआ। इसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं—जैव विविधता का संरक्षण, उसका सतत उपयोग और लाभों का न्यायसंगत एवं समान बंटवारा। नागोया प्रोटोकॉल विशेष रूप से आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और लाभ-साझेदारी से जुड़ा है।
स्थानीय दस्तावेजीकरण और बैठक के प्रमुख बिंदु
देश में 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियां कार्यरत हैं। ये समितियां स्थानीय निकायों जैसे पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के तहत गठित होती हैं। इनका एक महत्वपूर्ण कार्य पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर तैयार करना है, जिसमें स्थानीय जैविक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और समुदाय-आधारित प्रथाओं का रिकॉर्ड रखा जाता है।
चंडीगढ़ बैठक में क्षमता निर्माण, एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग, और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही, भारत की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई, क्योंकि देश ने जैव विविधता पर कन्वेंशन को 7वां राष्ट्रीय रिपोर्ट और नागोया प्रोटोकॉल पर पहला राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत किया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी।
- जैव विविधता पर कन्वेंशन के तीन मुख्य लक्ष्य हैं: संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों का न्यायसंगत बंटवारा।
- नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और लाभ-साझेदारी से संबंधित है।
- पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करता है।
यह बैठक भारत में जैव विविधता संरक्षण को केवल नीति स्तर पर नहीं, बल्कि स्थानीय संस्थाओं और समुदायों की भागीदारी के जरिए मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।