जी7 मंच पर भारत ने ‘सर्वोदय’ से विकास का नया संदेश दिया

जी7 मंच पर भारत ने ‘सर्वोदय’ से विकास का नया संदेश दिया

न्यूयॉर्क में 24 सितंबर 2026 को हुई जी7 विकास मंत्रियों की दूसरी बैठक में भारत ने अपने विकास दृष्टिकोण को ‘सर्वोदय’ की अवधारणा के साथ प्रस्तुत किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर आयोजित इस बैठक में विदेश मंत्रालय के पश्चिमी मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत ने कहा कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि वित्तपोषण, घरेलू क्षमता निर्माण और संकटों से निपटने की क्षमता भी है।

सर्वोदय की अवधारणा और भारत का विकास दृष्टिकोण

‘सर्वोदय’ संस्कृत का शब्द है, जिसका आशय समाज के सभी वर्गों के कल्याण से है। भारतीय राजनीतिक चिंतन में यह विचार महात्मा गांधी और बाद में विनोबा भावे से जुड़ा रहा है। भारत ने जी7 मंच पर इसी विचार को आधार बनाकर यह रेखांकित किया कि विकास तभी टिकाऊ हो सकता है, जब वह समावेशी हो और उसके लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।

भारत ने अपने विकास साझेदारी मॉडल को भी इसी सोच का उदाहरण बताया। इस मॉडल में क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और परियोजना-आधारित सहायता शामिल होती है। भारत लंबे समय से इसे दक्षिण-दक्षिण सहयोग और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है।

जी7 विकास मंत्रियों की बैठक का महत्व

जी7 दुनिया की सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं का अंतर-सरकारी मंच है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। वर्ष 2026 में फ्रांस ने जी7 की अध्यक्षता संभाली और न्यूयॉर्क में विकास मंत्रियों की बैठक आयोजित की।

जी7 के विकास मंत्रियों की बैठकें वैश्विक विकास सहयोग, साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय विकास नीतियों पर समन्वय के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसी बैठकें अक्सर संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे बड़े बहुपक्षीय आयोजनों के साथ आयोजित की जाती हैं, ताकि वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके।

संयुक्त राष्ट्र महासभा और विकास के अधिकार पर भारत का रुख

81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के उच्च-स्तरीय खंड में भारत की भागीदारी इसलिए भी अहम रही क्योंकि यह ‘विकास के अधिकार’ संबंधी घोषणा की 40वीं वर्षगांठ के साथ जुड़ी थी। यह घोषणा 1986 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाई गई थी।

भारत ने इस अवसर पर विकास के अधिकार पर एक व्यापक संधि को जल्द अपनाने की अपील की और बहुपक्षीय सुधारों के प्रति अपना समर्थन दोहराया। इससे यह संकेत मिला कि भारत वैश्विक विकास बहस में केवल सहायता प्राप्त करने वाले देश की भूमिका में नहीं, बल्कि एक सक्रिय विकास साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ‘सर्वोदय’ का अर्थ है सभी का कल्याण, और यह भारतीय सामाजिक-राजनीतिक चिंतन से जुड़ा है।
  • जी7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
  • विकास के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा 1986 में अपनाई गई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र वर्ष 2026 में आयोजित हुआ।

जी7 मंच पर भारत का यह संदेश दिखाता है कि वह विकास को केवल आर्थिक सूचकांकों तक सीमित नहीं मानता, बल्कि उसे सामाजिक न्याय, क्षमता निर्माण और वैश्विक साझेदारी से जोड़कर देखता है।

Originally written on September 25, 2026 and last modified on September 25, 2026.

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