जीजे 3378बी: रहने योग्य क्षेत्र में स्थित पृथ्वी जैसा बाह्यग्रह बना वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण

जीजे 3378बी: रहने योग्य क्षेत्र में स्थित पृथ्वी जैसा बाह्यग्रह बना वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण

ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज लगातार वैज्ञानिकों के लिए शोध का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। इसी दिशा में जीजे 3378बी (GJ 3378b) नामक बाह्यग्रह ने खगोलविदों का ध्यान आकर्षित किया है। यह ग्रह लाल बौने तारे ग्लीज़ 3378 की परिक्रमा करता है, जो हमारे सौर मंडल से लगभग 25 प्रकाश वर्ष दूर उत्तरी तारामंडल कैमेलोपार्डालिस में स्थित है। इस ग्रह की पहली पहचान वर्ष 2024 में हुई थी, जबकि कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन के वैज्ञानिकों ने इसके आंकड़ों का पुनः विश्लेषण कर 1 जुलाई 2026 को संशोधित परिणाम प्रकाशित किए हैं।

जीजे 3378बी और इसका मेजबान तारा

जीजे 3378बी एक मंद प्रकाश वाले लाल बौने तारे की परिक्रमा करता है। लाल बौने तारे कम द्रव्यमान वाले, अपेक्षाकृत ठंडे तथा आकाशगंगा में सबसे अधिक संख्या में पाए जाने वाले तारों में शामिल हैं। इनकी चमक कम होने के कारण इनके चारों ओर मौजूद ग्रहों का सटीक अध्ययन करना चुनौतीपूर्ण होता है। ग्लीज़ 3378 की स्थिति उत्तरी आकाश के कैमेलोपार्डालिस तारामंडल में है, जिससे इस ग्रह प्रणाली का अवलोकन विशेष उपकरणों की सहायता से किया जाता है।

द्रव्यमान, कक्षा और रहने योग्य क्षेत्र

नए अध्ययन के अनुसार, जीजे 3378बी का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग 2.3 गुना है। इससे पहले इसका अनुमान लगभग 5.3 पृथ्वी द्रव्यमान लगाया गया था। इसी प्रकार इसकी परिक्रमा अवधि को भी संशोधित कर 21.45 दिन निर्धारित किया गया है, जबकि पहले इसे लगभग 25 दिन माना गया था। यह ग्रह अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र (हैबिटेबल ज़ोन) में स्थित है। रहने योग्य क्षेत्र वह क्षेत्र होता है जहां किसी ग्रह की सतह पर, यदि उपयुक्त वायुमंडल मौजूद हो, तो तरल जल के बने रहने की संभावना रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जीजे 3378बी को अपने तारे से लगभग 90 प्रतिशत उतना ही विकिरण प्राप्त होता है जितना पृथ्वी को सूर्य से मिलता है। इस कारण यह ग्रह रहने योग्य क्षेत्र के भीतरी भाग के निकट माना जाता है।

ग्रह की खोज कैसे हुई?

जीजे 3378बी की खोज रेडियल-वेलोसिटी (Radial Velocity) तकनीक के माध्यम से की गई। इस विधि में किसी ग्रह के गुरुत्वाकर्षण के कारण उसके मेजबान तारे की गति में होने वाले अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तनों को मापा जाता है। इन आंकड़ों से ग्रह के द्रव्यमान और उसकी परिक्रमा अवधि का अनुमान लगाया जाता है। इस अध्ययन में टेक्सास स्थित मैकडॉनल्ड वेधशाला के हॉबी-एबरली टेलीस्कोप पर लगे हैबिटेबल-ज़ोन प्लैनेट फाइंडर तथा एरिज़ोना के डब्ल्यूआईवाईएन टेलीस्कोप पर स्थापित एनईआईडी स्पेक्ट्रोमीटर का उपयोग किया गया। इन अत्याधुनिक उपकरणों ने ग्रह के संशोधित मापदंडों का अधिक सटीक निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भविष्य के अध्ययन और संभावनाएं

हालांकि जीजे 3378बी रहने योग्य क्षेत्र में स्थित है, लेकिन अभी तक यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि इसके पास वायुमंडल मौजूद है या नहीं। किसी भी ग्रह पर जीवन की संभावनाओं का आकलन करने के लिए उसके वायुमंडल की संरचना और सतह पर तरल जल की उपलब्धता की पुष्टि आवश्यक होती है। भविष्य में नासा की प्रस्तावित हैबिटेबल वर्ल्ड्स ऑब्जर्वेटरी, जिसे 2040 के दशक में लॉन्च करने की योजना है, इस ग्रह के वायुमंडल तथा संभावित जैविक संकेतों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बाह्यग्रह (एक्सोप्लैनेट) वे ग्रह होते हैं जो हमारे सौर मंडल के बाहर किसी अन्य तारे की परिक्रमा करते हैं।
  • लाल बौने तारे सूर्य की तुलना में छोटे, कम द्रव्यमान वाले और अपेक्षाकृत ठंडे होते हैं।
  • रहने योग्य क्षेत्र (हैबिटेबल ज़ोन) को परितारकीय रहने योग्य क्षेत्र भी कहा जाता है।
  • रेडियल-वेलोसिटी तकनीक का उपयोग ग्रह के द्रव्यमान और उसकी कक्षा की अवधि का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।

जीजे 3378बी का संशोधित अध्ययन वैज्ञानिकों को पृथ्वी जैसे ग्रहों की प्रकृति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। यदि भविष्य में इसके वायुमंडल की पुष्टि होती है, तो यह ग्रह जीवन की संभावनाओं की खोज में सबसे महत्वपूर्ण बाह्यग्रहों में से एक बन सकता है और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

Originally written on July 6, 2026 and last modified on July 6, 2026.

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