जादुगुड़ा में यूरेनियम खनन की 60 साल की यात्रा
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) ने 4 अक्टूबर 2026 को जादुगुड़ा में अपने डायमंड जुबिली वर्ष की शुरुआत की। यह अवसर भारत में यूरेनियम खनन की उस लंबी यात्रा से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत 1967 में जादुगुड़ा खदान से हुई थी। जादुगुड़ा देश की पहली यूरेनियम खदान रही है और आज भी भारत के परमाणु ईंधन आपूर्ति तंत्र में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है।
भारत के परमाणु कार्यक्रम में यूसीआईएल की भूमिका
यूसीआईएल की स्थापना 1967 में हुई थी और यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। इसका मुख्य काम भारत में यूरेनियम का खनन और प्रसंस्करण करना है। यूरेनियम एक रेडियोधर्मी धातु है, जिसका उपयोग परमाणु बिजलीघरों में ईंधन के रूप में किया जाता है। इसलिए यूसीआईएल की गतिविधियाँ सीधे तौर पर देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और घरेलू ईंधन आपूर्ति से जुड़ी हैं।
भारत जैसे देश के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परमाणु ऊर्जा को दीर्घकालिक और अपेक्षाकृत स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों में गिना जाता है। ऐसे में यूरेनियम की घरेलू उपलब्धता ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से अहम हो जाती है।
जादुगुड़ा खदान और वैज्ञानिक गतिविधियाँ
झारखंड में स्थित जादुगुड़ा खदान भूमिगत यूरेनियम खनन के लिए जानी जाती है। यहां 815 मीटर स्तर पर भूमिगत संचालन से जुड़ी गतिविधियाँ होती हैं। इस स्तर का उपयोग केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों के लिए भी इसकी उपयोगिता सामने आई है।
यूसीआईएल की अन्य सुविधाएँ, जैसे नरवापहाड़ क्षेत्र, भी उसके खनन नेटवर्क का हिस्सा हैं। जादुगुड़ा में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान आरएंडडी केंद्र में स्थित टेक्नोलॉजी डेमोन्स्ट्रेशन पायलट प्लांट का भी अवलोकन किया गया। इसके अलावा, एसाहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स की प्रस्तावित डार्क मैटर लैबोरेटरी के लिए 815 मीटर स्तर को संभावित स्थल के रूप में देखा जा रहा है।
जागरूकता, सहयोग और भविष्य की दिशा
इस अवसर पर नरवापहाड़ स्थित यूसीआईएल सूचना केंद्र में पत्रकारों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई, जबकि स्कूल छात्रों के लिए डीएई प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी भी लगाई गई। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य खनन, परमाणु ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच संबंध को अधिक व्यापक रूप से समझाना है।
यूसीआईएल ने इस मौके पर भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए सुरक्षित और स्थिर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका को रेखांकित किया। देश ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भी रखा है, जिससे आने वाले वर्षों में यूरेनियम खनन और संबंधित अवसंरचना की अहमियत और बढ़ सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूसीआईएल की स्थापना 1967 में हुई थी और यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन काम करता है।
- जादुगुड़ा खदान ने 1967 में उत्पादन शुरू किया था और यह भारत की पहली यूरेनियम खदान थी।
- यूरेनियम का उपयोग परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में किया जाता है।
- भारत में परमाणु ऊर्जा नीति और दिशा-निर्धारण में परमाणु ऊर्जा आयोग की अहम भूमिका होती है।
जादुगुड़ा की 60 साल की यह यात्रा भारत के परमाणु ईंधन, खनन तकनीक और वैज्ञानिक सहयोग के विकास को भी दर्शाती है। आने वाले समय में यह क्षेत्र देश की ऊर्जा रणनीति में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।