रेलवे की एआई पहल से हाथी-ट्रेन टकराव पर लगाम

रेलवे की एआई पहल से हाथी-ट्रेन टकराव पर लगाम

भारतीय रेल ने वन्यजीव-संवेदनशील इलाकों में हाथी-ट्रेन टकराव कम करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, गति-नियंत्रण और चेतावनी प्रणालियों का उपयोग तेज किया है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच अपने अलिपुरद्वार, लुमडिंग, तिनसुकिया और रंगिया मंडलों में 255 हाथियों को सुरक्षित रखने में सफलता हासिल की।

एआई आधारित निगरानी से समय रहते अलर्ट

रेलवे ट्रैक के हाथी गलियारों में Intrusion Detection System (IDS) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक एआई-आधारित सुरक्षा उपकरण है, जो Distributed Acoustic System (DAS) तकनीक की मदद से ट्रैक के पास हाथियों की गतिविधि पहचानता है। जैसे ही हाथी की मौजूदगी का संकेत मिलता है, लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है।

4 फरवरी 2026 तक NFR के भीतर वन विभाग द्वारा चिन्हित महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर 141 रूट किलोमीटर क्षेत्र में यह प्रणाली चालू थी। भारतीय रेल ने देश के विभिन्न जोनों में कुल 1,158 रूट किलोमीटर के लिए IDS कार्यों को मंजूरी दी है, जिस पर लगभग 208 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

Plan Bee और अन्य रोकथाम उपाय

हाथियों को रेलवे ट्रैक से दूर रखने के लिए Plan Bee प्रणाली भी अपनाई गई है। इसमें मधुमक्खियों जैसी तेज ध्वनि का उपयोग कर हाथियों को संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की जाती है। यह व्यवस्था खास तौर पर जंगलों और वन्यजीव-समृद्ध इलाकों में प्रभावी मानी जा रही है।

इसके साथ ही रेलवे ने कई गैर-तकनीकी उपाय भी लागू किए हैं। कुछ चुनिंदा हिस्सों पर रात के समय और अस्थायी गति-सीमाएं लगाई जाती हैं। संवेदनशील सेक्शनों में गश्त बढ़ाई जाती है, चेतावनी संकेत लगाए जाते हैं, ट्रैक के आसपास की झाड़ियां साफ की जाती हैं और वन्यजीवों की आवाजाही के लिए अंडरपास भी बनाए जा रहे हैं।

Gajraj AI और वन्यजीव संरक्षण का मॉडल

Gajraj AI नाम की निगरानी प्रणाली भी हाथी गलियारों में सुरक्षित क्रॉसिंग सुनिश्चित करने में मदद कर रही है। 13 अगस्त 2026 तक इस प्रणाली ने लगभग 9,500 सुरक्षित हाथी क्रॉसिंग में सहायता की और इसके संचालन के बाद से निगरानी वाले हिस्से में किसी हाथी की मौत दर्ज नहीं हुई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में काम करता है, जहां कई हाथी गलियारे रेलवे लाइनों को काटते हैं।
  • Distributed Acoustic System (DAS) ट्रैक के पास ध्वनि-आधारित पहचान के लिए उपयोग की जाने वाली तकनीक है।
  • रूट किलोमीटर या Rkm रेलवे लाइन की लंबाई मापने की मानक इकाई है।
  • हाथी-ट्रेन टकराव रोकने में तकनीकी और गैर-तकनीकी, दोनों तरह के उपाय अपनाए जाते हैं।

इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि रेलवे सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण अब साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में एआई, चेतावनी तंत्र और ट्रैक-स्तरीय प्रबंधन भविष्य में ऐसे हादसों को और कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Originally written on October 5, 2026 and last modified on October 5, 2026.

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