आंध्र प्रदेश में 3D प्रिंटिंग से ग्रामीण आवास निर्माण की नई शुरुआत
आंध्र प्रदेश ने 4 अक्टूबर 2026 को 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक पर आधारित भारत की पहली पायलट आवास परियोजना शुरू की। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) 2.0 के तहत गुंटूर जिले के तेनाली मंडल स्थित बुर्रिपालेम और ओबुलनायडुपालेम गांवों में 177 घरों के निर्माण के लिए की जा रही है। इस परियोजना को ग्रामीण आवास निर्माण में तेज़ी, मजबूती और तकनीकी नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
3D कंक्रीट प्रिंटिंग क्या है और यह क्यों खास है
3D कंक्रीट प्रिंटिंग निर्माण की एक ऐसी पद्धति है जिसमें कंप्यूटर-नियंत्रित प्रिंटर की मदद से सीमेंट-आधारित सामग्री को परत-दर-परत जमा कर संरचना तैयार की जाती है। इसे निर्माण क्षेत्र में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भी कहा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक से एक घर लगभग 10 दिनों में तैयार किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक ईंट-गारे वाली पद्धति में इससे अधिक समय लगता है।
यह तकनीक केवल गति ही नहीं, बल्कि निर्माण की एकरूपता और संभावित टिकाऊपन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीण आवास योजनाओं में यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।
परियोजना की लागत, वित्तपोषण और साझेदारी
इस पायलट परियोजना की अनुमानित लागत 13.93 करोड़ रुपये है, जिसमें कर शामिल नहीं हैं। इसमें केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय 9.44 करोड़ रुपये का योगदान दे रहा है, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार 4.49 करोड़ रुपये दे रही है।
परियोजना के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन की योजना बनाई गई है। सीएसआईआर-सीबीआरआई, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद का एक घटक प्रयोगशाला संस्थान है, जो भवन सामग्री, संरचनात्मक अभियांत्रिकी और निर्माण तकनीकों पर काम करता है।
ग्रामीण आवास नीति में तकनीक का बढ़ता महत्व
PMAY-G ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के घर उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है। ऐसे में 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीक का उपयोग केवल निर्माण प्रक्रिया को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय, श्रम और संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावना भी दिखाता है।
इस परियोजना के तहत 177 घरों को लॉन्च की तारीख से छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन घरों को पारंपरिक ग्रामीण आवास मॉडलों की तुलना में अधिक टिकाऊ और लंबे जीवनकाल वाला बनाने पर जोर दिया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 3D कंक्रीट प्रिंटिंग को निर्माण क्षेत्र में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भी कहा जाता है।
- PMAY-G, प्रधानमंत्री आवास योजना का ग्रामीण घटक है।
- सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की, भवन निर्माण और सामग्री अनुसंधान से जुड़ा एक प्रमुख संस्थान है।
- गुंटूर जिला आंध्र प्रदेश में स्थित है और तेनाली मंडल इसी जिले का हिस्सा है।
यह परियोजना ग्रामीण आवास निर्माण में तकनीक के प्रयोग का एक अहम परीक्षण है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में कम लागत और तेज़ निर्माण के लिए इसे व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकता है।