चाय उद्योग में नई पेशेवर पहचान: टी बोर्ड के टी-टेस्टिंग कोर्स

चाय उद्योग में नई पेशेवर पहचान: टी बोर्ड के टी-टेस्टिंग कोर्स

भारत के चाय क्षेत्र में गुणवत्ता, ब्रांड वैल्यू और बाजार प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए टी बोर्ड इंडिया ने पेशेवर चाय-चखने यानी टी-टेस्टिंग से जुड़े कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। 3 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के कुर्सियांग स्थित दार्जिलिंग टी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में शुरू हुए इन कोर्सों को राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) की मंजूरी मिली है।

चाय-चखने को मिला औपचारिक कौशल का दर्जा

चाय उद्योग में टी टेस्टर की भूमिका केवल स्वाद पहचानने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह चाय की गुणवत्ता, ग्रेडिंग, ब्लेंडिंग और बाजार के लिए चयन में अहम योगदान देता है। इस काम में लिकर का रंग, सुगंध, स्वाद, ताजगी, ताकत और आफ्टरटेस्ट जैसे पहलुओं का मानकीकृत तरीके से आकलन किया जाता है। इसी विशेषज्ञता को अब औपचारिक प्रशिक्षण के दायरे में लाया गया है, ताकि उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सके।

दो कोर्स, एक लक्ष्य: गुणवत्ता और बाजार क्षमता

इस पहल के तहत दो कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। पहला 60 घंटे का Essentials of Tea Sommelier सर्टिफिकेट कोर्स है, जबकि दूसरा 210 घंटे का विस्तृत कोर्स है। शुरुआती बैच में 60 घंटे वाले कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसमें चाय की समझ, पेशेवर टेस्टिंग तकनीक, ब्लेंडिंग और भविष्य उन्मुख प्रथाओं पर जोर दिया गया है।पाठ्यक्रम तैयार करने में कृषि कौशल परिषद भारत (Agriculture Skill Council of India) ने सहयोग दिया। इसके अलावा, वाणिज्य विभाग, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और उद्योग विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों वाली एक फॉर्मुलेशन कमेटी ने सिलेबस तैयार किया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक न होकर उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा हो।

नीति ढांचे से जुड़ाव और उद्योग के लिए महत्व

इन कोर्सों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (NSQF) के अनुरूप बनाया गया है। NCVET की मंजूरी के बाद ये कार्यक्रम भारत की औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था का हिस्सा बन गए हैं, जिसमें कौशल मानक, मूल्यांकन और प्रमाणन की व्यवस्था शामिल होती है।टी बोर्ड इंडिया वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है और देश के चाय उद्योग के विकास के लिए जिम्मेदार है। दार्जिलिंग चाय पश्चिम बंगाल की एक भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त चाय है और अपनी ऑर्थोडॉक्स चाय उत्पादन शैली के लिए जानी जाती है। ऐसे में दार्जिलिंग जैसे प्रतिष्ठित केंद्र से टी-टेस्टिंग प्रशिक्षण की शुरुआत उद्योग की गुणवत्ता-आधारित पहचान को और मजबूत कर सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • टी बोर्ड इंडिया की स्थापना टी एक्ट, 1953 के तहत की गई थी।
  • NCVET भारत में व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण का राष्ट्रीय नियामक है।
  • NSQF भारत में कौशल प्रमाणन के लिए क्षमता-आधारित ढांचा प्रदान करता है।
  • दार्जिलिंग टी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर कुर्सियांग, दार्जिलिंग जिला, पश्चिम बंगाल में स्थित है।

चाय-चखने के इन औपचारिक कोर्सों से न केवल प्रशिक्षित टी टेस्टर और टी सोमेलियर तैयार होंगे, बल्कि भारतीय चाय उद्योग को गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर पर भी नई मजबूती मिलेगी।

Originally written on August 4, 2026 and last modified on August 4, 2026.

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