ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की वैश्विक दावेदारी को नई रफ्तार
नई दिल्ली में 23 जुलाई 2026 को आयोजित 2nd Bharat Green Hydrogen Summit 2026 ने भारत की ऊर्जा रणनीति में ग्रीन हाइड्रोजन की बढ़ती भूमिका को केंद्र में ला दिया। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में ग्रीन हाइड्रोजन, हाइड्रोजन-आधारित मोबिलिटी और ऊर्जा क्षेत्र में निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
ग्रीन हाइड्रोजन क्यों अहम है
ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है, जिसे पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए नवीकरणीय बिजली से तैयार किया जाता है। जब उत्पादन में सौर, पवन या अन्य स्वच्छ स्रोतों की बिजली इस्तेमाल होती है, तो इसे कम-कार्बन ईंधन माना जाता है। यही वजह है कि इसे भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।इसका उपयोग रिफाइनिंग, उर्वरक उत्पादन, इस्पात निर्माण, लंबी अवधि के ऊर्जा भंडारण और भारी परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। ऐसे उद्योगों में, जहां सीधे विद्युतीकरण की प्रक्रिया आसान नहीं होती, वहां ग्रीन हाइड्रोजन एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभर रहा है।
राष्ट्रीय मिशन और भारत की नीति दिशा
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के विकास के लिए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन केंद्रीय नीति ढांचा है। यह मिशन उत्पादन, भंडारण, परिवहन और अंतिम उपयोग से जुड़ी अवसंरचना को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसके तहत इलेक्ट्रोलाइजर के घरेलू निर्माण, हाइड्रोजन हब के विकास और औद्योगिक क्षेत्रों में मांग तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।सम्मेलन को संबोधित करते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने भारत की इस दिशा में प्रगति को रेखांकित किया। सम्मेलन का विषय था—“Positioning India as a Global Hydrogen Hub”, जो भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा को स्पष्ट करता है।
उद्योग, निर्यात और मोबिलिटी पर फोकस
गुजरात के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल मंत्री ऋषिकेश गणेशभाई पटेल ने कहा कि राज्य के पास नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन, बंदरगाह, औद्योगिक ढांचा और ग्रीन हाइड्रोजन नीति जैसी मजबूत आधारभूत सुविधाएं हैं। इससे राज्य को हाइड्रोजन इकोसिस्टम के विकास में बढ़त मिल सकती है।FICCI की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि भारत 2030 तक वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार का लगभग 10% हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य रखता है। इसी दौरान जारी FICCI-EY रिपोर्ट “Towards a Green Hydrogen Economy: India’s Export Competitiveness and Strategic Outlook” में भारत की निर्यात क्षमता, औद्योगिक तैयारी और प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ता बनने की संभावनाओं का आकलन किया गया।सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, तकनीकी प्रदाताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों ने भाग लिया। भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को भी घरेलू क्षमता के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रीन हाइड्रोजन पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से बनाया जाता है, जिसमें नवीकरणीय बिजली का उपयोग होता है।
- इलेक्ट्रोलिसिस वह प्रक्रिया है, जिसमें बिजली की मदद से पानी के अणुओं को तोड़ा जाता है।
- हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें हाइड्रोजन मोबिलिटी तकनीक का हिस्सा हैं।
- FICCI का पूरा नाम Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry है।
ग्रीन हाइड्रोजन पर यह सम्मेलन दिखाता है कि भारत केवल स्वच्छ ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य के ऊर्जा बाजार में एक संभावित वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।