खनन सुधारों और खनिज नीलामी पर गोवा में राज्यों की अहम बैठक
खनन और कोयला क्षेत्र में सुधार, निवेश तथा खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग पर चर्चा के लिए 5–6 नवंबर 2026 को गोवा में चौथा खनन मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित हो रहा है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के खनन मंत्री और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
खनिज प्रशासन और नीलामी पर रहेगा जोर
सम्मेलन के एजेंडे में खनन और कोयला क्षेत्रों में हुए सुधारों की समीक्षा के साथ उनकी प्रगति, उपलब्ध अवसरों और चुनौतियों पर विचार शामिल है। राज्यों को अपने अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करने का अवसर दिया गया है। इसका उद्देश्य खनिज प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और राज्यों के बीच उपयोगी नीतिगत अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी के नए चरण शुरू किए जाने और खनिज शासन को मजबूत करने वाली डिजिटल पहलों का शुभारंभ भी प्रस्तावित है। महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों के लिए अहम है, इसलिए उनकी पहचान, नीलामी और प्रबंधन में पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बिहार और गोवा की योजनाएं
बिहार के खान एवं भूविज्ञान मंत्री प्रमोद कुमार राज्य की खनिज संपदा, खनन आधारित औद्योगिक विकास की रणनीति और निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत करेंगे। राज्य सरकारों की ऐसी योजनाओं से खनिज संसाधनों को स्थानीय उद्योग और आर्थिक विकास से जोड़ने के प्रयासों की जानकारी मिलेगी।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के अनुसार, राज्य दिसंबर तक लौह अयस्क खनन के 8–9 अतिरिक्त ब्लॉकों की ई-नीलामी करने की योजना बना रहा है। राज्य में पहले नीलाम किए गए 17 ब्लॉकों में से फिलहाल केवल 6 चालू हैं। जिन कंपनियों ने नीलामी में ब्लॉक हासिल करने के बावजूद उन्हें परिचालन में नहीं लाया है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने हैं। इससे नीलाम खनन क्षेत्रों को समय पर चालू करने और संसाधनों के उपयोग पर राज्य का जोर स्पष्ट होता है।
खनन में संघ और राज्यों की भूमिका
खनिजों के विनियमन और विकास का विषय राज्य सूची से जुड़ा है, लेकिन संघ सूची के अंतर्गत संसद को इस क्षेत्र में कानून बनाने की शक्ति भी है। इसलिए राज्यों की खनन नीतियों पर केंद्रीय कानूनों का प्रभाव रहता है। खनन से जुड़े निर्णयों में आर्थिक उपयोग के साथ पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की रक्षा को भी महत्व देना आवश्यक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- खनिज विनियमन एवं विकास राज्य सूची से संबंधित है, लेकिन संसद संघ सूची के अधिकारों के तहत कानून बना सकती है और राज्य केंद्रीय कानूनों से बंधे होते हैं।
- महत्वपूर्ण खनिजों की सूची और उनकी परिभाषा अलग-अलग देशों में तथा समय के साथ बदल सकती है; इसकी कोई सार्वभौमिक स्थिर सूची नहीं है।
- 2011 के सुधार विधेयक में ज्ञात खनिजीकरण वाले क्षेत्रों के लिए प्रतिस्पर्धी बोली और अज्ञात खनिजीकरण वाले क्षेत्रों के लिए पहले आओ, पहले पाओ का प्रस्ताव था।
- सतत खनन ढांचे में जैव विविधता की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने के उपाय शामिल होने चाहिए।
गोवा में होने वाला यह सम्मेलन खनिज नीलामी, राज्यों की योजनाओं और डिजिटल प्रशासन को एक साझा चर्चा में लाता है। इसकी दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि संसाधनों के विकास के साथ जवाबदेही और पर्यावरणीय सुरक्षा को किस तरह जोड़ा जाता है।