अरुणाचल कीवी के लिए दुबई बाजार के दरवाजे खुले

अरुणाचल कीवी के लिए दुबई बाजार के दरवाजे खुले

अरुणाचल प्रदेश के जीरो में उगाए गए कीवी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में परखने के लिए 3 और 4 नवंबर 2026 को दुबई भेजा गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने 1.5 मीट्रिक टन कीवी के इस परीक्षण निर्यात को सुगम बनाया।

दुबई में ग्राहकों की प्रतिक्रिया परखने की पहल

दुबई पहुंची खेप को अल कुसैस स्थित लुलु हाइपरमार्केट में खुदरा बाजार आकलन के लिए प्रदर्शित किया गया। इस प्रक्रिया में उपभोक्ताओं को कीवी चखने और अपनी प्रतिक्रिया देने का अवसर मिला। आकलन का उद्देश्य यह समझना है कि स्थानीय ग्राहक उत्पाद को किस तरह स्वीकार करते हैं और बाजार की क्या जरूरतें हैं।

परीक्षण निर्यात से अरुणाचल के कीवी उत्पादकों को संभावित खरीदारों और बाजार से जुड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। ग्राहकों की पसंद, उत्पाद की मांग और बाजार की आवश्यकताओं से जुड़ी जानकारी आगे की विपणन रणनीति बनाने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, यह खेप परीक्षण का हिस्सा है; इसे नियमित निर्यात के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

चार किस्मों का बाजार आकलन

दुबई में किए जा रहे आकलन में हेवर्ड, मॉन्टी, एलिसन और ब्रूनो किस्में शामिल हैं। इनमें हेवर्ड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग वाली किस्म बताया गया है। अलग-अलग किस्मों को एक ही खुदरा मंच पर प्रस्तुत करने से उनकी स्वीकार्यता को समझने का अवसर मिलता है।

यह पहल अरुणाचल प्रदेश के कीवी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है और इसे “कीवी: अरुणाचल प्रदेश की विशिष्ट पहचान” नाम से प्रस्तुत किया गया है। राज्य के उत्पाद को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने और बाजार संबंध मजबूत करने की कोशिश इस पहल का अहम हिस्सा है।

एपीडा और निर्यात व्यवस्था की भूमिका

एपीडा कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाला वैधानिक प्राधिकरण है। इसकी स्थापना एपीडा अधिनियम, 1985 के तहत हुई थी। अधिनियम की धारा 12 के अनुसार, निर्धारित उत्पादों के निर्यातकों को निर्यात शुरू करने से पहले प्राधिकरण के साथ पंजीकरण कराना होता है। अरुणाचल कीवी का यह परीक्षण निर्यात इसी व्यापक निर्यात-संवर्धन प्रयास के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एपीडा की स्थापना कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत हुई।
  • एपीडा अधिनियम की धारा 12 के अनुसार, निर्धारित उत्पादों के निर्यातकों के लिए प्राधिकरण में पंजीकरण आवश्यक है।
  • कीवी के पौधे सामान्यतः नर और मादा होते हैं; फल उत्पादन के लिए मादा पौधों को आम तौर पर नर पौधे के पराग की जरूरत होती है।
  • कीवी की अधिकांश किस्मों का प्रवर्धन अलैंगिक तरीके से किया जाता है। इच्छित किस्म के गुण बनाए रखने के लिए फल देने वाले पौधे को मूलवृंत पर कलम किया जा सकता है।

दुबई में उपभोक्ता प्रतिक्रिया से मिलने वाली जानकारी अरुणाचल के कीवी उत्पादकों को नए बाजार की मांग समझने और भविष्य के निर्यात अवसरों की दिशा तय करने में मदद कर सकती है।

Originally written on November 4, 2026 and last modified on November 4, 2026.

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