क्यूएस एशिया रैंकिंग में 71% भारतीय संस्थानों की गिरावट
क्यूएस एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 में भारत के लगभग 71 प्रतिशत संस्थानों की रैंकिंग पिछले संस्करण की तुलना में नीचे आई है। 3 नवंबर 2026 को जारी इस सूची में भारत के 325 संस्थान शामिल हैं, जिनमें 34 नए संस्थान हैं। संस्थानों की संख्या के लिहाज से भारत एशिया में दूसरे स्थान पर रहा; उससे आगे मुख्यभूमि चीन है।
शीर्ष भारतीय संस्थानों की रैंकिंग भी फिसली
भारत के छह सबसे ऊंची रैंक वाले संस्थानों की स्थिति में गिरावट दर्ज की गई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली 66वें स्थान पर रहा, जबकि पिछले संस्करण में वह 59वें स्थान पर था। भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु 15 पायदान नीचे आकर 79वें स्थान पर पहुंचा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे की रैंकिंग भी 71वें से गिरकर 83वें स्थान पर रही। लगातार दूसरे वर्ष कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय समग्र शीर्ष 50 में जगह नहीं बना सका।
प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय पहुंच से जुड़े संकेतक
रैंकिंग के अलग-अलग संकेतकों में भी भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन कमजोर रहा। 76 प्रतिशत से अधिक संस्थानों की शैक्षणिक प्रतिष्ठा में गिरावट आई, जबकि 83 प्रतिशत संस्थानों के नियोक्ता-प्रतिष्ठा संकेतक और 85 प्रतिशत के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी संकेतक में कमी दर्ज हुई। ये संकेतक विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक छवि, रोजगारदाताओं के बीच पहचान और विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित करने की स्थिति को दर्शाते हैं।
अनुसंधान उत्पादन के एक मानक में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। प्रति शैक्षणिक कर्मचारी अनुसंधान उत्पादन के आधार पर भारत के 27 संस्थान एशिया के शीर्ष 50 में शामिल हुए। इस श्रेणी में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु पहले स्थान पर रहा। इससे स्पष्ट है कि समग्र रैंकिंग में गिरावट के बावजूद कुछ भारतीय संस्थानों का शोध प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।
एशियाई रैंकिंग की पद्धति और दायरा
क्यूएस की क्षेत्रीय रैंकिंग में संकेतकों का भार वैश्विक रैंकिंग से अलग रखा जाता है और क्षेत्र विशेष के मानक भी जोड़े जाते हैं। इनमें विद्यार्थी और शैक्षणिक कर्मचारियों के आदान-प्रदान, पीएचडीधारी शैक्षणिक कर्मचारियों तथा वेब पर संस्थान की दृश्यता जैसे पहलू शामिल हैं। पात्रता तय करने के लिए 2022 के संस्करण में संयुक्त राष्ट्र के एम49 भौगोलिक वर्गीकरण का उपयोग किया गया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- क्यूएस की एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग की शुरुआत 2009 में हुई थी।
- यह रैंकिंग दक्षिण कोरिया के समाचारपत्र चोसुन इल्बो के साथ साझेदारी में शुरू की गई थी।
- क्षेत्रीय रैंकिंग में विद्यार्थी आदान-प्रदान और पीएचडीधारी शैक्षणिक कर्मचारियों जैसे अतिरिक्त मानक शामिल किए जाते हैं।
- 2022 के संस्करण में क्षेत्रीय पात्रता तय करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के एम49 मानक का उपयोग हुआ था।
भारत की व्यापक संस्थागत मौजूदगी के बावजूद रैंकिंग में आई गिरावट शैक्षणिक प्रतिष्ठा, अंतरराष्ट्रीय पहुंच और रोजगारदाताओं के बीच पहचान को बेहतर बनाने की चुनौती उजागर करती है।