पीएलएफएस सर्वेक्षण में 2027 से बदलाव, काम के नए रूपों पर भी होगा ध्यान

पीएलएफएस सर्वेक्षण में 2027 से बदलाव, काम के नए रूपों पर भी होगा ध्यान

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जनवरी 2027 से आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नई नमूना योजना और प्रश्नावली के जरिए बदलती आबादी, डिजिटल मंचों पर काम तथा अवैतनिक गतिविधियों की बेहतर जानकारी जुटाने की योजना है।

रोजगार की तस्वीर के लिए अहम सर्वेक्षण

पीएलएफएस भारत में रोजगार और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े एकत्र करता है। इससे श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक-जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर जैसे प्रमुख संकेतक तैयार होते हैं। सर्वेक्षण में रोजगार की स्थिति समझने के लिए अलग-अलग संदर्भ अवधियों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें सामान्य स्थिति और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति शामिल हैं।

इन संकेतकों से यह समझने में मदद मिलती है कि कितने लोग काम कर रहे हैं, कितने लोग काम की तलाश में हैं और आबादी के मुकाबले श्रमिकों का अनुपात क्या है। इसलिए सर्वेक्षण की नमूना योजना और प्रश्नों में बदलाव का असर श्रम बाजार की तस्वीर पर पड़ सकता है।

नए नमूने और डिजिटल कामगारों की पहचान

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय 2027–2028 के लिए नया नमूना तैयार करने का प्रस्ताव कर रहा है, जिसे पैनल 6 कहा गया है। जनवरी 2027 से अद्यतन नमूना आधार का उपयोग किया जाएगा। इसमें शहरीकरण और प्रशासनिक सीमाओं में हुए बदलावों को ध्यान में रखा जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के लिए जनगणना 2011 पर आधारित अद्यतन आधार प्रस्तावित है। पैनल 5 के अनुभव के आधार पर नमूना आवंटन और वर्गीकरण के मानदंड भी संशोधित किए जाएंगे।

डिजिटल मंचों के जरिए काम करने वाले लोगों की पहचान और कवरेज सुधारने के लिए एक नया द्वितीय चरण वर्ग प्रस्तावित है। पीएलएफएस 2026 के अनुभव में इस श्रेणी के कामगारों की पर्याप्त जानकारी दर्ज नहीं हो पाई थी। संशोधित प्रश्नावली में ऐसे परिवारों की पहचान के लिए सवाल शामिल होंगे, जिनके सदस्य डिजिटल मंचों पर काम करते हैं।

काम की व्यापक परिभाषा और बदलाव की प्रक्रिया

प्रस्तावित प्रश्नावली में अवैतनिक घरेलू और देखभाल संबंधी गतिविधियों, स्वयंसेवी कार्य तथा बिना वेतन प्रशिक्षण कार्य के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इससे रोजगार के पारंपरिक आंकड़ों के साथ ऐसे कामों का विवरण भी सामने आ सकता है, जिन्हें सामान्यतः वेतन वाले रोजगार के रूप में दर्ज नहीं किया जाता।

बदलाव के दौरान जनवरी से मार्च 2027 तक नमूने में पैनल 5 के मौजूदा आधार और पैनल 6 के अद्यतन आधार, दोनों की प्रथम चरण इकाइयां शामिल करने की योजना है। मंत्रालय ने 23 अक्टूबर 2026 को नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम लोगों से प्रस्तावों पर 15 दिनों के भीतर सुझाव मांगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संचालित किया जाता है, जो सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन है।
  • श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक-जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर इसके प्रमुख श्रम बाजार संकेतक हैं।
  • पैनल 6 को 2027–2028 की अवधि के लिए तैयार करने का प्रस्ताव है।
  • जनवरी–मार्च 2027 के संक्रमण काल में पैनल 5 और पैनल 6, दोनों की प्रथम चरण इकाइयां नमूने में शामिल होंगी।

प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य श्रम बाजार के बदलते स्वरूप को सर्वेक्षण में अधिक स्पष्ट रूप से दर्ज करना है। अंतिम पद्धति पर सुझावों और समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा।

Originally written on October 24, 2026 and last modified on October 24, 2026.

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