स्वास्थ्य सेवा की धारणा में भारत तीसरे स्थान पर, लेकिन खर्च बड़ी चुनौती
इप्सोस स्वास्थ्य सेवा रिपोर्ट 2026 के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर लोगों की धारणा के सूचकांक में भारत 32 देशों में तीसरे स्थान पर है। भारत के 68 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अपने लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सकारात्मक बताया। इस सूची में मलेशिया पहले और सिंगापुर दूसरे स्थान पर रहे। यह रैंकिंग लोगों की राय पर आधारित है, न कि इलाज के चिकित्सकीय परिणामों या स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता के आकलन पर।
सर्वेक्षण में भारत की प्रमुख उपलब्धि
इप्सोस ने 13 जुलाई से 7 अगस्त 2026 के बीच 32 देशों के 22,528 वयस्कों से सर्वेक्षण किया। इसमें भारत ने डॉक्टर से मिलने का समय हासिल करने की सहजता के मामले में सबसे ऊँचा परिणाम दर्ज किया। भारत के 73 प्रतिशत लोगों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे डॉक्टर की सेवा प्राप्त कर सकते हैं। रिपोर्ट में भारतीय उत्तरदाताओं के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसे और उनकी उपलब्धता को लेकर भी सकारात्मक धारणा दर्ज की गई है।
हालाँकि, रिपोर्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं की वहनीयता को भारत के लिए चुनौती बताया है। यानी लोगों को डॉक्टर तक पहुँच अपेक्षाकृत आसान लग सकती है, लेकिन उपचार का खर्च अब भी एक बाधा बना हुआ है। स्वास्थ्य व्यवस्था का आकलन करते समय पहुँच, लागत और उपचार के नतीजों को अलग-अलग पहलुओं के रूप में देखना जरूरी है।
धारणा आधारित सूचकांक और वास्तविक स्वास्थ्य परिणाम
इप्सोस का सूचकांक सर्वेक्षण में शामिल लोगों के अनुभवों और विचारों को मापता है। इसलिए इसे मृत्यु दर, रोगों के बोझ, स्वास्थ्य सेवाओं के कवरेज या उपचार की गुणवत्ता के चिकित्सकीय आकलन के समान नहीं समझना चाहिए। सर्वेक्षण में शामिल देशों के बीच तुलना भी केवल उन्हीं 32 देशों तक सीमित है; यह दुनिया के हर देश की रैंकिंग नहीं है।
अलग पद्धति से किए गए अध्ययनों में भारत की स्थिति अलग रही है। मई 2018 में प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन ने स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और गुणवत्ता के मामले में भारत को 195 देशों में 145वाँ स्थान दिया था। मई 2017 के एक अध्ययन में भारत 195 देशों में 154वें स्थान पर था। इन आँकड़ों और इप्सोस की रैंकिंग के बीच अंतर का कारण उनके मापन के आधार में फर्क है।
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था का व्यापक संदर्भ
भारत में स्वास्थ्य सेवाएँ सरकारी और निजी संस्थानों के माध्यम से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तरों पर दी जाती हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, अस्पताल और औषधालय राज्य सूची के विषय हैं। इस व्यवस्था में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ अलग-अलग स्तरों पर साझा होती है। इप्सोस के नतीजे नागरिकों के अनुभवों की उपयोगी झलक देते हैं, लेकिन उनसे पूरे स्वास्थ्य तंत्र के प्रदर्शन का निष्कर्ष अकेले नहीं निकाला जा सकता।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इप्सोस सर्वेक्षण में 32 देशों के 22,528 वयस्क शामिल थे; सर्वेक्षण 13 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक हुआ।
- गुणवत्ता की धारणा वाले सूचकांक में मलेशिया पहले, सिंगापुर दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर रहा।
- डॉक्टर से मिलने का समय प्राप्त करने की सहजता पर भारत का 73 प्रतिशत परिणाम सर्वेक्षित देशों में सबसे अधिक था।
- ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के 2018 अध्ययन में स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और गुणवत्ता के लिए भारत 195 देशों में 145वें स्थान पर था।
भारत की तीसरी रैंकिंग नागरिकों के अनुभव और भरोसे का सकारात्मक संकेत है, जबकि वहनीयता की चुनौती बताती है कि बेहतर पहुँच के साथ उपचार का खर्च कम करना भी स्वास्थ्य नीति की प्राथमिकता बना रहना चाहिए।