लानचेनबी चानू का कांस्य, यूथ ओलंपिक में भारत का पहला वुशू पदक
मणिपुर की 15 वर्षीय लानचेनबी चानू ने 3 नवंबर 2026 को सेनेगल के दकार में आयोजित युवा ओलंपिक खेलों में महिला चांगछ्वान संयुक्त स्पर्धा का कांस्य पदक जीता। यह इन खेलों में भारत का पहला वुशू पदक है।
चांगछ्वान स्पर्धा में दमदार प्रदर्शन
चानू ने कुल 18.039 अंक हासिल किए। इसमें गुनशु के लिए 8.723 और चांगछ्वान के लिए 9.316 अंक शामिल थे। मिस्र की सोंदोस सोनबोल ने 18.660 अंकों के साथ स्वर्ण और वेनेजुएला की वालेरिया फ्रैनरीस दुडामेल अल्वाराडो ने 18.199 अंकों के साथ रजत पदक जीता।
वुशू को दकार युवा ओलंपिक 2026 में पहली बार पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया। ये युवा ओलंपिक खेल पहली बार अफ्रीका में आयोजित हुए। चानू इससे पहले चीन के तियानजिन में 2026 विश्व जूनियर वुशू चैंपियनशिप की लड़कियों की युवा चांगछ्वान स्पर्धा में भी कांस्य जीत चुकी हैं।
वुशू की स्पर्धाओं को समझें
प्रतिस्पर्धी वुशू की दो प्रमुख विधाएं हैं—ताओलू और सांडा। ताओलू में खिलाड़ी बिना हथियार या हथियारों के साथ निर्धारित मुद्राओं और तकनीकों का प्रदर्शन करते हैं। गुनशु ताओलू की ऐसी ही विधा है, जिसमें लाठी का उपयोग होता है। इसमें फैसला प्रतिद्वंद्वी पर बनाए अंकों से नहीं, बल्कि निर्णायकों के तकनीकी और प्रदर्शन संबंधी अंकों से होता है।
सांडा पूर्ण संपर्क वाली मुकाबला-आधारित विधा है। इसलिए गुनशु और सांडा में खेल का स्वरूप तथा विजेता तय करने का तरीका अलग होता है।
दकार खेलों में भारत की पदक स्थिति
चानू का कांस्य दकार युवा ओलंपिक में भारत का तीसरा पदक था। इससे पहले खुशबू राजकभाई दरजादा ने जूडो में रजत और धिनिधि देसिंघु ने तैराकी में कांस्य पदक जीता था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- युवा ओलंपिक खेलों का आयोजन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति करती है।
- ताओलू में निर्धारित तकनीकों का प्रदर्शन होता है, जबकि सांडा मुकाबला-आधारित वुशू विधा है।
- गुनशु में खिलाड़ी लाठी के साथ ताओलू प्रदर्शन करते हैं।
- युवा ओलंपिक में कुछ मिश्रित राष्ट्रीय ओलंपिक समिति स्पर्धाओं में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक ही टीम में भाग लेते हैं।
चानू की उपलब्धि भारत के लिए वुशू में एक नई शुरुआत है और युवा खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मौजूदगी को रेखांकित करती है।