कोयला नीलामी से ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को नई रफ्तार
कोयला मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को वाणिज्यिक कोयला खनन की 15वीं बोली और 13वीं दौर की पूरक प्रक्रिया के तहत छह कोयला ब्लॉकों की नीलामी पूरी की। इन ब्लॉकों में कुल 1,503 मिलियन टन से अधिक भूवैज्ञानिक भंडार और 11.62 मिलियन टन प्रति वर्ष की संयुक्त पीक रेटेड क्षमता है। यह कदम घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन-कौन से ब्लॉक नीलाम हुए
नीलाम किए गए छह ब्लॉक तेलंगाना, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। इनमें तेलंगाना का डिप साइड एक्सटेंशन ऑफ PKOC, मध्य प्रदेश के डोंगेरी ताल-II और मंडला साउथ, झारखंड के मार्गो ईस्ट और मार्गो वेस्ट, तथा छत्तीसगढ़ का तारा (संशोधित) ब्लॉक शामिल है। इनमें चार ब्लॉक पूरी तरह अन्वेषित हैं, जबकि दो ब्लॉक आंशिक रूप से अन्वेषित हैं। कोयला संसाधन आकलन में यह वर्गीकरण इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे खनन की तैयारी, निवेश और उत्पादन योजना तय करने में मदद मिलती है।
किसे मिला कौन-सा ब्लॉक
नीलामी के बाद डिप साइड एक्सटेंशन ऑफ PKOC ब्लॉक द सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड को मिला। डोंगेरी ताल-II गैलेंट इस्पात लिमिटेड को, मंडला साउथ क्यूब कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड को, मार्गो ईस्ट और मार्गो वेस्ट झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को तथा तारा (संशोधित) सीजी सिं-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड को आवंटित किया गया। सरकार के अनुसार इन ब्लॉकों से लगभग ₹1,983 करोड़ का वार्षिक राजस्व मिलने का अनुमान है। साथ ही करीब ₹1,743 करोड़ का पूंजी निवेश आकर्षित हो सकता है और कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में 15,000 से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
वाणिज्यिक कोयला खनन क्यों अहम है
भारत में वाणिज्यिक कोयला खनन नीलामियों की शुरुआत 2020 में हुई थी, जब कोयला क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोला गया। इस व्यवस्था के तहत निजी और सार्वजनिक दोनों तरह की संस्थाएं कोयला ब्लॉकों के लिए बोली लगा सकती हैं। इन ब्लॉकों से निकला कोयला खुले बाजार में बिक्री या कैप्टिव उपयोग, यानी अपनी औद्योगिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्रक्रिया कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न्स) ढांचे के तहत चलती है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात बिल कम करना, ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना और खनन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में वाणिज्यिक कोयला खनन नीलामियां 2020 से शुरू हुईं।
- पीक रेटेड क्षमता (PRC) किसी खदान की नियोजित परिस्थितियों में अधिकतम वार्षिक उत्पादन क्षमता को दर्शाती है।
- भूवैज्ञानिक भंडार वह अनुमानित कोयला मात्रा है, जिसमें खनन के दौरान होने वाली हानि को पहले शामिल नहीं किया जाता।
- 2020 से अब तक सरकार 147 कोयला ब्लॉक आवंटित कर चुकी है, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 377.97 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
यह नीलामी दिखाती है कि सरकार कोयला क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाकर उत्पादन, निवेश और रोजगार तीनों मोर्चों पर गति देना चाहती है। आने वाले समय में इन ब्लॉकों से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अतिरिक्त सहारा मिलने की उम्मीद है।