कोयला क्षेत्र के लिए पहली CSR रूपरेखा से स्थानीय विकास को नई दिशा
केंद्र सरकार ने कोयला कंपनियों के लिए देश की पहली क्षेत्र-विशिष्ट व्यापक CSR रूपरेखा जारी की है। 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड ने इस पहल की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य खनन क्षेत्रों में सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियों को अधिक पारदर्शी, परिणाम-आधारित और मापनीय बनाना है।
खनन क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से बनेगी CSR योजना
यह रूपरेखा भारतीय कोयला कंपनियों के लिए तैयार की गई है और इसे भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान ने ड्राफ्ट किया है। इसका फोकस उन क्षेत्रों पर है जहां कोयला खनन, विस्थापन, औद्योगिक दबाव और पर्यावरणीय असर जैसी चुनौतियां अधिक रहती हैं। ऐसे इलाकों में CSR के जरिए स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, कौशल विकास और पर्यावरण पुनर्स्थापन जैसी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती है।
सरकार का मानना है कि अब तक CSR गतिविधियां कई बार सामान्य ढांचे में चलती थीं, जबकि खनन-आधारित जिलों की समस्याएं अलग प्रकृति की होती हैं। नई रूपरेखा से स्थानीय विकास योजनाओं को अधिक लक्षित तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
कानूनी ढांचा और नीति का महत्व
भारत में CSR की वैधानिक आधारशिला कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 है। यह प्रावधान तय मानकों वाली कंपनियों पर CSR खर्च की जिम्मेदारी डालता है। कोयला क्षेत्र के लिए जारी यह नई रूपरेखा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की पहली ऐसी सेक्टर-विशिष्ट CSR गाइडलाइन है, जो सामान्य नियमों के बाद एक अलग उद्योग-आधारित दिशा देती है।
लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त मौजूद रहे। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को अतिरिक्त सचिव रुपिंदर बरार की अध्यक्षता में एक हितधारक बैठक भी हुई थी, जिसमें स्थानीय प्राथमिकताओं और ग्रीन क्रेडिट से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा की गई।
कोल इंडिया की सामाजिक पहलों से मिला आधार
इस नई रूपरेखा के संदर्भ में कोल इंडिया लिमिटेड की मौजूदा CSR पहलों को भी अहम माना जा रहा है। कंपनी ने थैलेसीमिया बाल सेवा योजना के तहत 1,050 से अधिक बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया है। इस योजना में प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की सहायता 21 सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से दी जाती है, और चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
इसी तरह, कंपनी की ‘नन्हा सा दिल’ पहल के तहत मार्च 2024 से अब तक 2 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है और 1,500 से ज्यादा मुफ्त सुधारात्मक सर्जरी कराई गई हैं। ये कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य और विशेष उपचार पर केंद्रित CSR मॉडल का उदाहरण हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में CSR का कानूनी आधार कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 है।
- कोल इंडिया लिमिटेड कोयला मंत्रालय के अधीन एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।
- भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- ग्रीन क्रेडिट पर्यावरणीय गतिविधियों के मापन से जुड़ा एक उभरता हुआ ढांचा है।
कोयला क्षेत्र के लिए यह पहल CSR को केवल खर्च की औपचारिकता से आगे बढ़ाकर स्थानीय विकास के एक अधिक व्यवस्थित उपकरण के रूप में स्थापित करने की कोशिश है। खनन प्रभावित इलाकों में इसका असर आने वाले समय में सामाजिक और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर देखा जा सकता है।