केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की पहल संसद तक पहुंची
केंद्र सरकार ने लोकसभा में केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 पेश किया है, जिसके जरिए राज्य का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत उठाया गया है, जो राज्यों के गठन, सीमाओं में बदलाव और नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
संवैधानिक प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है
भारत में किसी राज्य का नाम बदलना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होता, बल्कि इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। संविधान की प्रथम अनुसूची में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम दर्ज हैं, इसलिए नाम परिवर्तन के लिए उसमें संशोधन जरूरी होता है। अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य का नाम बदल सके।
इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति संबंधित राज्य विधानसभा से विधेयक पर राय लेने के लिए उसे भेज सकते हैं। हालांकि राज्य की राय महत्वपूर्ण होती है, अंतिम निर्णय संसद के विधायी अधिकार क्षेत्र में ही रहता है।
केरल विधानसभा की भूमिका और केंद्र की मंजूरी
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम केरल से केरलम करने की मांग की थी। इससे पहले अगस्त 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव पारित हुआ था, जिसे बाद में केंद्र की तकनीकी सलाह के आधार पर संशोधित किया गया।
केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली। उसी दिन सरकार ने यह भी कहा था कि राष्ट्रपति विधेयक को राज्य विधानसभा की राय के लिए भेजेंगे, ताकि आगे की संसदीय कार्रवाई से पहले संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी हो सकें।
नाम बदलने से प्रशासनिक स्तर पर क्या-क्या बदलता है
किसी राज्य का नाम बदलने पर केवल कागजों में संशोधन नहीं होता, बल्कि कई स्तरों पर बदलाव करने पड़ते हैं। सरकारी रिकॉर्ड, कानूनी दस्तावेज, मानचित्र, डेटाबेस, पहचान-पत्रों से जुड़े संदर्भ और सरकारी साइनबोर्ड तक में नए नाम के अनुसार संशोधन करना होता है।
ऐसे बदलाव केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों के विभागों के बीच समन्वय मांगते हैं। संविधान, प्रशासन और अभिलेखों में एकरूपता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संविधान का अनुच्छेद 3 नए राज्यों के गठन और मौजूदा राज्यों के नाम, क्षेत्रफल या सीमाओं में बदलाव से जुड़ा है।
- प्रथम अनुसूची में भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम दर्ज हैं।
- केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को नाम बदलकर केरलम करने का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 फरवरी 2026 को केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी थी।
अब यह प्रस्ताव संसद की विधायी प्रक्रिया के अगले चरणों से गुजरेगा। यदि सभी संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी होती हैं, तो राज्य के आधिकारिक नाम में बदलाव की दिशा में अंतिम कदम उठाया जाएगा।