कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-5 में रिएक्टर प्रेशर वेसल की स्थापना

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-5 में रिएक्टर प्रेशर वेसल की स्थापना

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब मिली जब न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-5 में रिएक्टर प्रेशर वेसल की सफल स्थापना पूरी कर ली। लगभग 320 टन वजनी इस उपकरण की स्थापना परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद की गई। यह उपलब्धि परियोजना के निर्माण कार्य में एक महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है और भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा रणनीति को मजबूती प्रदान करती है।

रिएक्टर प्रेशर वेसल का महत्व

रिएक्टर प्रेशर वेसल किसी भी परमाणु रिएक्टर का सबसे महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। यह रिएक्टर की मुख्य दाब सीमा के रूप में कार्य करता है और इसके भीतर रिएक्टर कोर स्थित होता है, जहां नियंत्रित वातावरण में नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया संचालित होती है। दाबित जल रिएक्टर प्रणाली में यह उपकरण रिएक्टर के आंतरिक ढांचे को सहारा देने के साथ-साथ शीतलक परिसंचरण व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा परमाणु संयंत्र के सुरक्षित संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक होती है।

कुडनकुलम परियोजना की विशेषताएं

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित है। यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। परियोजना में कुल छह इकाइयों की योजना बनाई गई है और प्रत्येक इकाई की क्षमता 1,000 मेगावाट है। इस प्रकार सभी इकाइयों के संचालन में आने के बाद कुल स्थापित क्षमता 6,000 मेगावाट विद्युत होगी। परियोजना में रूस द्वारा विकसित वीवीईआर-1000 तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो दाबित जल रिएक्टर की एक उन्नत और विश्वसनीय प्रणाली मानी जाती है।

ओपन-टॉप इंस्टॉलेशन पद्धति का उपयोग

यूनिट-5 में रिएक्टर प्रेशर वेसल की स्थापना ओपन-टॉप इंस्टॉलेशन पद्धति के माध्यम से की गई। इस तकनीक में भारी उपकरणों को रिएक्टर भवन के भीतर उस समय स्थापित किया जाता है जब कंटेनमेंट डोम का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ होता। बड़े और अत्यधिक वजनी परमाणु उपकरणों की स्थापना के लिए यह पद्धति प्रभावी मानी जाती है क्योंकि इसमें उच्च क्षमता वाली क्रेनों की सहायता से उपकरणों को सटीक स्थिति में स्थापित किया जा सकता है। इससे निर्माण कार्य की गति और दक्षता दोनों में सुधार होता है।

भारत-रूस सहयोग और परमाणु ऊर्जा लक्ष्य

कुडनकुलम परियोजना भारत और रूस के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा संस्था रोसाटॉम तथा उसकी इंजीनियरिंग इकाई एटमस्ट्रोयएक्सपोर्ट इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह परियोजना भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक है। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और कुडनकुलम की नई इकाइयां इस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड भारत में परमाणु सुरक्षा और नियमन के लिए जिम्मेदार संस्था है, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करती है।
  • वीवीईआर का पूर्ण रूप “वॉटर-वॉटर एनर्जेटिक रिएक्टर” है, जो दाबित जल रिएक्टर की एक प्रमुख तकनीक है।
  • रोसाटॉम रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा निगम है, जो दुनिया के कई देशों में परमाणु परियोजनाओं में भागीदारी करती है।
  • कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के सभी छह यूनिट चालू होने पर इसकी कुल क्षमता 6,000 मेगावाट विद्युत होगी।

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-5 में रिएक्टर प्रेशर वेसल की स्थापना भारत की ऊर्जा अवसंरचना के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि न केवल परियोजना की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि भारत के स्वच्छ, सुरक्षित और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में बढ़ते प्रयासों का भी प्रतीक है। आने वाले वर्षों में ऐसी परियोजनाएं देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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