किर्गिस्तान में ‘मानस और महाभारत’ अंतरराष्ट्रीय सभ्यता अध्ययन केंद्र का शुभारंभ
भारत और किर्गिस्तान के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए 4 से 7 जुलाई 2026 के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने किर्गिस्तान का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान राजधानी बिश्केक में ‘मानस और महाभारत’ अंतरराष्ट्रीय सभ्यता अध्ययन केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र किर्गिस्तान की मानस नेशनल एकेडमी और नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस (सीएसआईआर) के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत और किर्गिस्तान की प्राचीन सभ्यताओं, सांस्कृतिक विरासत और महाकाव्य परंपराओं के तुलनात्मक अध्ययन को बढ़ावा देना है।
सभ्यताओं के अध्ययन के लिए संयुक्त पहल
मानस नेशनल एकेडमी किर्गिस्तान का प्रमुख संस्थान है, जो देश के राष्ट्रीय महाकाव्य ‘मानस’ के अध्ययन और संरक्षण के लिए समर्पित है। वहीं नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस अंतरराष्ट्रीय संबंधों, वैश्विक नीतियों और शैक्षणिक अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य करता है। दोनों संस्थानों के सहयोग से स्थापित यह नया केंद्र तुलनात्मक सभ्यता अध्ययन, इतिहास, संस्कृति और अंतरसांस्कृतिक संवाद के लिए साझा मंच के रूप में कार्य करेगा।
‘मानस’ और ‘महाभारत’ की समृद्ध परंपरा
‘मानस’ किर्गिस्तान का राष्ट्रीय महाकाव्य है और इसे विश्व की सबसे लंबी मौखिक महाकाव्य परंपराओं में से एक माना जाता है। दूसरी ओर, ‘महाभारत’ भारत का प्राचीन संस्कृत महाकाव्य है, जो ‘रामायण’ के साथ भारतीय साहित्य के दो प्रमुख महाकाव्यों में शामिल है। नया अध्ययन केंद्र इन दोनों महाकाव्यों की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का गहन अध्ययन करेगा। साथ ही यह विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ को भी बढ़ावा देगा।
हिंदी अनुवाद और शैक्षणिक सहयोग
उद्घाटन समारोह के अवसर पर किर्गिज़ महाकाव्य ‘मानस’ का पहला हिंदी अनुवाद भी जारी किया गया। इस अनुवाद को प्रोफेसर हेम चंद्र पांडे और प्रोफेसर रमाकांत द्विवेदी ने किर्गिज़ लेखक मार बैझीयेव द्वारा तैयार रूसी काव्यात्मक पुनर्कथन के आधार पर तैयार किया है। इसके साथ ही मानस नेशनल एकेडमी, सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस तथा किर्गिस्तान के सात प्रमुख विश्वविद्यालयों, जिनमें केएनयू, बीएसयू, एयूसीए और अला-टू शामिल हैं, के बीच त्रिपक्षीय सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य संयुक्त शोध, छात्र एवं शिक्षकों का आदान-प्रदान तथा सांस्कृतिक अध्ययन को बढ़ावा देना है।
सांस्कृतिक कूटनीति को मिलेगा नया आयाम
इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं मीडिया एवं संचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के मानद निदेशक डॉ. पुनीत गौर ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित सभ्यतागत संवाद मंच की अवधारणा से जोड़ते हुए यूरेशियाई सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह केंद्र भारत और मध्य एशिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग, शैक्षणिक अनुसंधान और मानवीय कूटनीति को नई दिशा प्रदान करेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ‘मानस’ किर्गिस्तान का राष्ट्रीय महाकाव्य है और इसे विश्व की सबसे लंबी मौखिक महाकाव्य परंपराओं में गिना जाता है।
- ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ प्राचीन भारत के दो प्रमुख संस्कृत महाकाव्य हैं।
- हिंदी भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं में से एक है।
- अंतरसांस्कृतिक संवाद और मानवीय कूटनीति सभ्यतागत अध्ययन तथा सांस्कृतिक संबंधों के महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं।
‘मानस और महाभारत’ अंतरराष्ट्रीय सभ्यता अध्ययन केंद्र की स्थापना भारत और किर्गिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह केंद्र दोनों देशों की समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ शोध, शिक्षा और सभ्यताओं के बीच संवाद को भी नई गति प्रदान करेगा।