कावेरी इंजन ने उड़ान परीक्षण में बढ़ाई भारत की स्वदेशी ताकत

कावेरी इंजन ने उड़ान परीक्षण में बढ़ाई भारत की स्वदेशी ताकत

भारत के स्वदेशी कावेरी ड्राई इंजन कार्यक्रम ने सितंबर 2026 में एक अहम उपलब्धि दर्ज की, जब रूस में हुए उच्च-ऊंचाई और उड़ान परीक्षणों के दौरान इंजन ने 48.5 किलो न्यूटन का अधिकतम ड्राई थ्रस्ट हासिल किया। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह इंजन भारत के प्रस्तावित ग़ातक स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू विमान के लिए विकसित किया जा रहा है।

कावेरी कार्यक्रम क्यों अहम है

कावेरी भारत की स्वदेशी एयरो-इंजन विकास पहल है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अंतर्गत बेंगलुरु स्थित गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य सैन्य विमानन के लिए देश में ही इंजन तकनीक तैयार करना है, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो और भविष्य के लड़ाकू प्लेटफॉर्म के लिए भरोसेमंद स्वदेशी विकल्प उपलब्ध हो सके।

इस कार्यक्रम का ड्राई संस्करण नॉन-आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है। वहीं आफ्टरबर्निंग संस्करण को अधिक थ्रस्ट देने के लिए डिजाइन किया जाता है, जो लड़ाकू विमानों के लिए उपयोगी होता है। हालिया परीक्षणों में इंजन ने अपने लक्ष्य के करीब प्रदर्शन किया है, क्योंकि इसका निर्धारित ड्राई थ्रस्ट लगभग 46 किलो न्यूटन रखा गया था।

रूस में हुए परीक्षणों की खासियत

परीक्षण रूस के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मोटर्स और ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट में किए गए। इन उड़ान परीक्षणों में संशोधित इल्युशिन Il-76 फ्लाइंग टेस्टबेड का उपयोग हुआ, जिसमें एक मानक इंजन को हटाकर कावेरी इंजन लगाया गया था। इस तरह के परीक्षण वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में इंजन के प्रदर्शन, स्थिरता और विश्वसनीयता का आकलन करने में मदद करते हैं।

इल्युशिन Il-76 चार इंजन वाला सोवियत-डिजाइन परिवहन विमान है, जिसे अक्सर फ्लाइंग टेस्टबेड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। वास्तविक वायुमंडलीय परिस्थितियों में परीक्षण होने से इंजन की क्षमता का अधिक सटीक मूल्यांकन संभव होता है।

आगे की राह और प्रमाणन प्रक्रिया

रक्षा मंत्रालय ने 2026 को स्वदेशी ड्राई कावेरी इंजन के प्रमाणन का लक्ष्य वर्ष तय किया है। परीक्षण डेटा की समीक्षा सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन करेगा, जिसके बाद एयरवर्थिनेस क्लीयरेंस की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद इंजन को संबंधित प्लेटफॉर्म में एकीकृत किया जाएगा।

गौरतलब है कि नॉन-आफ्टरबर्निंग कावेरी इंजन को 23 दिसंबर 2024 को इनफ्लाइट टेस्टिंग के लिए मंजूरी मिली थी। इसके साथ ही कावेरी 2.0 पर भी काम चल रहा है, जिसे अधिक शक्तिशाली संस्करण के रूप में विकसित किया जा रहा है। अनुमान है कि यह 55–60 किलो न्यूटन ड्राई थ्रस्ट और 90–100 किलो न्यूटन आफ्टरबर्नर के साथ दे सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ड्राई थ्रस्ट का अर्थ है आफ्टरबर्नर के बिना इंजन द्वारा उत्पन्न थ्रस्ट।
  • आफ्टरबर्नर जेट इंजन में अतिरिक्त ईंधन जलाकर थ्रस्ट बढ़ाने की तकनीक है।
  • ग़ातक भारत का प्रस्तावित स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू विमान है।
  • GTRE, DRDO के अंतर्गत बेंगलुरु में स्थित एक प्रमुख गैस टरबाइन अनुसंधान प्रयोगशाला है।

कावेरी इंजन की यह प्रगति भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि प्रमाणन और एकीकरण की प्रक्रिया समय पर आगे बढ़ती है, तो यह कार्यक्रम भविष्य के सैन्य विमानन प्लेटफॉर्म के लिए बड़ी तकनीकी आधारशिला बन सकता है।

Originally written on September 30, 2026 and last modified on September 30, 2026.

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