भारत का पहला वाणिज्यिक थर्मल CubeSat मिशन TAPAS-1 चर्चा में

भारत का पहला वाणिज्यिक थर्मल CubeSat मिशन TAPAS-1 चर्चा में

अहमदाबाद की स्पेसटेक स्टार्टअप SatLeo Labs 1 अक्टूबर 2026 को अपना थर्मल-इमेजिंग सैटेलाइट TAPAS-1 लॉन्च करने जा रही है। यह भारत का पहला समर्पित वाणिज्यिक CubeSat-श्रेणी का थर्मल पेलोड होगा, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी की सतह के तापमान का अध्ययन करेगा। 3 किलोग्राम का यह पेलोड SpaceX Falcon 9 रॉकेट के जरिए Transporter-18 मिशन के तहत कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से प्रक्षेपित किया जाएगा।

क्या है TAPAS-1 और क्यों खास है यह मिशन

TAPAS-1 को Dhruva Space के LEAP-2 प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह उपग्रह लगभग 500 किलोमीटर ऊंचाई पर सूर्य-समकालिक कक्षा में काम करेगा। इसमें लॉन्ग-वेव इन्फ्रारेड सेंसर लगाया गया है, जो सामान्य ऑप्टिकल कैमरों से दिखाई न देने वाली तापीय जानकारी को रिकॉर्ड कर सकता है। इसी वजह से यह मिशन सतह के तापमान, गर्मी के पैटर्न और तापीय बदलावों को समझने में उपयोगी होगा।

किस क्षेत्रों में होगा उपयोग

थर्मल इमेजिंग तकनीक का उपयोग उन स्थितियों में खास तौर पर किया जाता है, जहां दृश्य प्रकाश आधारित तस्वीरें पर्याप्त जानकारी नहीं दे पातीं। TAPAS-1 से जलवायु निगरानी, कृषि, शहरी तापमान मानचित्रण, जल-तनाव की निगरानी, औद्योगिक निगरानी, आपदा प्रबंधन और जंगलों में आग की पहचान जैसे क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है।

कृषि में यह तकनीक फसल और मिट्टी की गर्मी से जुड़े संकेतों को समझने में सहायक हो सकती है, जबकि शहरों में हीट-आइलैंड प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है। इसी तरह, जंगलों में आग की शुरुआती पहचान और औद्योगिक क्षेत्रों में तापीय असामान्यताओं की निगरानी भी इसके संभावित उपयोगों में शामिल है।

SatLeo Labs की योजना और आगे की रणनीति

SatLeo Labs की स्थापना 2023 में अहमदाबाद में श्रवण सिंह भाटी, डॉ. रणेंदु घोष और उर्मिल बखाई ने की थी। कंपनी की योजना 2029 तक इसी तरह के आठ और उपग्रह लॉन्च करने की है, ताकि 10 से 15 थर्मल-इमेजिंग सैटेलाइट्स का एक कॉन्स्टेलेशन तैयार किया जा सके। TAPAS-2 पहले से निर्माणाधीन है और इसका प्रक्षेपण मध्य-2027 में प्रस्तावित है।

कंपनी ने अब तक 60 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है और लगभग 52 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लेटर ऑफ इंटेंट भी प्राप्त किए हैं। इनमें करीब 60 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से आए हैं, जो इस तकनीक में वैश्विक रुचि को दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CubeSat छोटे उपग्रहों का एक मानकीकृत प्रारूप है, जिसका उपयोग कम लागत और कॉम्पैक्ट अंतरिक्ष मिशनों में होता है।
  • सूर्य-समकालिक कक्षा पृथ्वी-अवलोकन उपग्रहों के लिए उपयोगी मानी जाती है, क्योंकि इसमें उपग्रह एक ही स्थानीय समय पर समान रोशनी में क्षेत्र की तस्वीरें ले सकता है।
  • लॉन्ग-वेव इन्फ्रारेड तकनीक तापीय संकेतों को पकड़ती है, जो सामान्य कैमरों से नहीं दिखते।
  • वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस अमेरिका के कैलिफोर्निया तट पर स्थित एक प्रमुख प्रक्षेपण स्थल है।

TAPAS-1 का प्रक्षेपण भारत के छोटे उपग्रहों और तापीय इमेजिंग तकनीक के क्षेत्र में बढ़ते निजी नवाचार को दिखाता है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण, कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए ऐसी तकनीक का दायरा और बढ़ सकता है।

Originally written on October 1, 2026 and last modified on October 1, 2026.

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