कश्मीर की पॉपलर-वीलोव खेती पर नए कीट का खतरा
जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी जिलों में पॉपलर और विलो की बागानों पर एक विदेशी, रस चूसने वाले कीट Drosicha turkistanica की मौजूदगी सामने आई है। पुलवामा के हंजीपोरा के साथ-साथ कुलगाम और अनंतनाग के कुछ हिस्सों में इसकी पहचान हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कीट पौधों का रस चूसकर पेड़ों को कमजोर कर सकता है और यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो नर्सरी और युवा बागानों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
कैसे हुई पहचान और क्यों बढ़ी चिंता
इस कीट के नमूने खदवानी स्थित माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स से एकत्र किए गए थे, जिसके बाद बेंगलुरु स्थित नेशनल ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चरल इन्सेक्ट रिसोर्सेज ने इसकी वैज्ञानिक पहचान की। किसानों ने लगभग दो साल पहले पेड़ों के तनों पर बर्फ जैसी सफेद, रूईनुमा परत देखी थी, जिसे शुरुआत में फफूंद संक्रमण समझ लिया गया। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह एक कीट-आधारित संक्रमण है।
पॉपलर और विलो पर असर
कश्मीर में पॉपलर और विलो केवल पेड़ नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। इनका उपयोग लकड़ी, प्लाईवुड और फार्म फॉरेस्ट्री में होता है। ऐसे में इन पर किसी भी नए कीट का फैलाव आर्थिक नुकसान बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीट लंबे समय तक रस चूसकर पेड़ों की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। खासकर युवा पौधों और नर्सरी स्टॉक पर इसका असर अधिक चिंता का विषय है।
क्वारंटीन और जैव-सुरक्षा की जरूरत
उद्यानिकी और पौध संरक्षण से जुड़े अधिकारियों ने इस कीट के प्रवेश को आयातित रोपण सामग्री से जोड़ा है। यह रास्ता विदेशी कीटों और पौध रोगों के फैलने का एक सामान्य माध्यम माना जाता है। इसलिए विशेषज्ञ नर्सरी स्टॉक की सख्त जांच, रोपण सामग्री के क्वारंटीन और समय पर वैज्ञानिक पहचान पर जोर दे रहे हैं। साथ ही, बिना सलाह के कीटनाशक छिड़काव से बचने की चेतावनी भी दी गई है, क्योंकि गलत दवा पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती है और कीट पर प्रभावी भी नहीं हो सकती।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Hemiptera कीटों का वह वर्ग है जिसमें एफिड, सिकाडा, लीफहॉपर और स्केल कीट शामिल होते हैं।
- Monophlebidae स्केल कीटों का एक परिवार है, जिनमें कई पौधों का रस चूसने वाले कीट होते हैं।
- पॉपलर और विलो कश्मीर में लकड़ी और फार्म फॉरेस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण वृक्ष हैं।
- नर्सरी स्टॉक का क्वारंटीन विदेशी कीटों और रोगों के फैलाव को रोकने की मानक प्रक्रिया है।
यह मामला दिखाता है कि पौध सामग्री की निगरानी और समय पर वैज्ञानिक पहचान कितनी जरूरी है। यदि ऐसे आक्रामक कीटों पर शुरुआती चरण में नियंत्रण नहीं हुआ, तो वे कृषि, वानिकी और स्थानीय आजीविका—तीनों पर असर डाल सकते हैं।