कर्नाटक में कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक पहचान देने पर विचार
कर्नाटक सरकार लाल-पीले कन्नड़ ध्वज को राज्य ध्वज के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की संभावना पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 1 नवंबर 2026 को बताया कि प्रस्ताव पर बेलगावी में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में चर्चा हो सकती है। सरकार का कहना है कि ध्वज की मान्यता राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उससे जुड़े नियमों के अनुरूप तय की जाएगी।
प्रस्ताव में किन व्यवस्थाओं पर विचार
बेलगावी में विधानसभा का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक निर्धारित है। सरकार इस दौरान कन्नड़ ध्वज के प्रदर्शन के लिए कानूनी ढाँचे पर चर्चा कर सकती है। इसमें सरकारी कार्यालयों और राज्य से सहायता पाने वाले संस्थानों में ध्वज फहराना अनिवार्य करने का विकल्प शामिल है। निजी संगठनों को भी इसे प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करने संबंधी आदेश पर विचार किया जा रहा है।
प्रस्ताव का अहम पहलू यह है कि कन्नड़ ध्वज भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शित किया जा सके, लेकिन ऐसा राष्ट्रीय ध्वज संबंधी नियमों का उल्लंघन किए बिना हो। इसी उद्देश्य से सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली है। फिलहाल यह विचाराधीन प्रस्ताव है; इसे लागू करने का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
2018 के प्रस्ताव से कैसे अलग है मौजूदा पहल
शिवकुमार के अनुसार, मौजूदा पहल में साधारण लाल-पीले ध्वज को मान्यता देने पर विचार हो रहा है। यह गंडभेरुंड चिह्न वाले नए त्रिवर्ण ध्वज के प्रस्ताव से अलग है। 2018 में कांग्रेस की पिछली सरकार ने उस नए डिजाइन को केंद्र सरकार के पास भेजा था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली थी।
इस बार प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य कर्नाटक की विशिष्ट पहचान, संस्कृति और आत्मसम्मान को मजबूत करना है। सरकार इसे भारत के संघीय ढाँचे के भीतर राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मान्यता देने के प्रयास के रूप में देख रही है।
ध्वज की पहचान और कानूनी पहलू
कन्नड़ ध्वज में पीले रंग की पट्टी ऊपर और लाल रंग की पट्टी नीचे होती है। इससे पहले राज्य के नक्शे और धान की बालियों वाले मुकुट से जुड़ा एक डिजाइन भी था, लेकिन लोगों की पसंद के बाद सरल लाल-पीले रूप को अपनाया गया। आधिकारिक दर्जे का प्रश्न केवल प्रतीकात्मक नहीं है; इसके साथ ध्वज के प्रदर्शन और राष्ट्रीय ध्वज के साथ उसके उपयोग के नियम भी तय करने होंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कन्नड़ ध्वज में दो समान आकार की क्षैतिज पट्टियाँ होती हैं—ऊपर पीली और नीचे लाल।
- पीला और लाल रंग क्रमशः हल्दी और सिंदूर से जोड़े जाते हैं; इन्हें शुभता, कल्याण, शांति और साहस के प्रतीक के रूप में बताया गया है।
- 2018 में भेजे गए गंडभेरुंड चिह्न वाले नए ध्वज डिजाइन को केंद्र से मंजूरी नहीं मिली थी।
- वर्तमान प्रस्ताव साधारण लाल-पीले ध्वज से संबंधित है, न कि 2018 वाले नए त्रिवर्ण डिजाइन से।
कर्नाटक सरकार की आगामी चर्चा से स्पष्ट होगा कि सांस्कृतिक पहचान को मान्यता देने और राष्ट्रीय ध्वज संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाता है।