एससीओ में सभ्यताओं के संवाद की मेजबानी करेगा भारत
भारत 2026 के अंत तक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के पहले सभ्यतागत संवाद मंच की मेजबानी करेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक के दौरान इसकी घोषणा की और सदस्य देशों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया।
सांस्कृतिक विरासत को साझा करने का मंच
इस मंच का उद्देश्य एससीओ देशों के लोगों के बीच संपर्क मजबूत करना और प्राचीन सभ्यताओं, कला, साहित्य तथा परंपराओं की विरासत साझा करना है। यह सदस्य देशों को सांस्कृतिक विषयों पर संवाद का अवसर देगा और संगठन के व्यापक सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान इस मंच की स्थापना का प्रस्ताव रखा था।
दुशांबे बैठक में सहयोग के मुद्दे
20 अक्टूबर 2026 को दुशांबे में हुई शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त विज्ञप्ति अपनाई। इसमें 2027 के लिए एससीओ का बजट और 2026–2030 की कार्ययोजना शामिल थी। शासनाध्यक्ष परिषद संगठन का वह तंत्र है जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम करता है।
भारत की एससीओ भागीदारी
भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है। संगठन में भारत की प्राथमिकताओं को सुरक्षा, संपर्क और अवसर के रूप में व्यक्त किया गया है। दुशांबे बैठक में राजनाथ सिंह ने स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलता और टिकाऊ उपभोग से जुड़े भारत के प्रयासों का भी उल्लेख किया। इनमें अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, मिशन लाइफ और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी।
- भारत 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बना।
- एससीओ सचिवालय चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित है।
- एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की कार्यकारी समिति ताशकंद, उज्बेकिस्तान में है।
भारत में प्रस्तावित यह मंच एससीओ के सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और जन-संपर्क को बढ़ाने की पहल है।