एशियाई खेलों में भारतीय महिला गोल्फ टीम ने रचा इतिहास
झज्जर की दीक्षा डागर, प्रणवी उर्स और अदिति अशोक की तिकड़ी ने एशियाई खेलों के महिला टीम गोल्फ मुकाबले में रजत पदक जीतकर भारत के लिए नया इतिहास रच दिया। 3 अक्टूबर 2026 को जापान के आइची-नागोया स्थित कसुगाई कंट्री क्लब ईस्ट कोर्स पर भारत ने 14-अंडर 546 के कुल स्कोर के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। यह एशियाई खेलों में महिला टीम गोल्फ में भारत का पहला पदक भी है।
भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
महिला टीम गोल्फ में पदक जीतना भारत के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह उपलब्धि लंबे समय से निरंतर सुधार कर रहे भारतीय महिला गोल्फ के स्तर को दिखाती है। टीम स्पर्धा में खिलाड़ियों के संयुक्त स्कोर से अंतिम रैंकिंग तय होती है, इसलिए हर राउंड में स्थिर प्रदर्शन बेहद अहम रहता है। भारत ने इस बार पूरे टूर्नामेंट में संतुलित खेल दिखाया और चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
प्रणवी उर्स का स्वर्ण, अदिति और दीक्षा का योगदान
इस एशियाई खेलों में भारतीय गोल्फरों के प्रदर्शन की सबसे बड़ी बात प्रणवी उर्स का व्यक्तिगत स्वर्ण पदक रहा। वह गोल्फ में एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। अदिति अशोक ने चार राउंड के बाद 2-ओवर 282 के स्कोर के साथ 14वां स्थान हासिल किया और अंतिम राउंड में 67 का कार्ड खेला। दीक्षा डागर ने 5-ओवर 285 के स्कोर के साथ संयुक्त 18वां स्थान पाया।
दीक्षा डागर का करियर भी खास है, क्योंकि उन्होंने पैरा और सक्षम, दोनों श्रेणियों में पदक जीते हैं। उनके नाम दो डेफलिंपिक्स पदक भी दर्ज हैं। इस तरह उनका रजत पदक भारतीय खेलों में बहुआयामी सफलता का उदाहरण बन गया है।
मुकाबले का स्वरूप और परिणाम
एशियाई खेलों में गोल्फ स्पर्धाएं व्यक्तिगत और टीम, दोनों वर्गों में स्ट्रोक-प्ले प्रारूप में होती हैं। इसमें कम स्ट्रोक का मतलब बेहतर प्रदर्शन होता है। महिला टीम स्पर्धा में चीन ने 22-अंडर 538 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत का स्कोर उससे आठ स्ट्रोक पीछे रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई खेलों की गोल्फ स्पर्धाएं स्ट्रोक-प्ले प्रारूप में होती हैं।
- महिला टीम स्पर्धा में खिलाड़ियों के संयुक्त स्कोर से अंतिम परिणाम तय होता है।
- कसुगाई कंट्री क्लब ईस्ट कोर्स जापान के आइची-नागोया में स्थित है।
- प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में गोल्फ का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
इस रजत पदक ने भारतीय महिला गोल्फ के लिए नई पहचान बनाई है और यह दिखाया है कि भारत अब टीम और व्यक्तिगत, दोनों स्तरों पर एशियाई मंच पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।