अहमदाबाद मैराथन को मिली वैश्विक मान्यता, रैंकिंग में भी बढ़ेगा महत्व

अहमदाबाद मैराथन को मिली वैश्विक मान्यता, रैंकिंग में भी बढ़ेगा महत्व

अडानी अहमदाबाद मैराथन को 5 अक्टूबर 2026 से वर्ल्ड एथलेटिक्स ग्लोबल कैलेंडर में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ यह दौड़ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रोड रेस बन गई है और इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन को वर्ल्ड एथलेटिक्स रैंकिंग में विचार के लिए पात्र माना जाएगा। गुजरात के अहमदाबाद में होने वाली यह मैराथन 29 नवंबर 2026 को अपनी 10वीं कड़ी के रूप में आयोजित होगी।

वर्ल्ड एथलेटिक्स कैलेंडर में शामिल होना क्यों अहम है

वर्ल्ड एथलेटिक्स एथलेटिक्स खेलों की वैश्विक शासी संस्था है, जो ट्रैक, फील्ड और रोड-रनिंग प्रतियोगिताओं की निगरानी करती है। इसके ग्लोबल कैलेंडर में शामिल प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों, महासंघों और खेल प्रशासकों के लिए एक साझा संदर्भ बनती हैं। किसी रोड रेस का इस सूची में आना केवल आयोजन की प्रतिष्ठा नहीं बढ़ाता, बल्कि उसकी तकनीकी और प्रशासनिक विश्वसनीयता को भी दर्शाता है।

रोड रेस की मान्यता के लिए कोर्स की माप और प्रमाणन, आयोजन की व्यवस्था, चिकित्सा तैयारियां, टाइमिंग और परिणाम प्रणाली, शीर्ष खिलाड़ियों के प्रबंधन तथा डोपिंग-रोधी नियमों के पालन जैसे मानकों का ध्यान रखा जाता है। इसी आधार पर अहमदाबाद मैराथन अब अंतरराष्ट्रीय रोड-रेसिंग कैलेंडर का हिस्सा बन गई है।

10वीं कड़ी में क्या होगा खास

अहमदाबाद मैराथन धीरे-धीरे एक शहर-स्तरीय आयोजन से बड़े जनभागीदारी वाले खेल आयोजन में बदल चुकी है। पिछली कड़ी में इसमें 24,000 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया था। 10वीं कड़ी में भी विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि पेशेवर धावकों के साथ आम प्रतिभागियों को भी अवसर मिल सके।

  • फुल मैराथन: 42.195 किमी
  • हाफ मैराथन: 21.097 किमी
  • 10 किमी रन
  • 5 किमी रन

इस तरह यह आयोजन प्रतिस्पर्धी खेल और सामुदायिक फिटनेस, दोनों को साथ लेकर चलता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वर्ल्ड एथलेटिक्स एथलेटिक्स की अंतरराष्ट्रीय शासी संस्था है।
  • फुल मैराथन की मानक दूरी 42.195 किमी होती है।
  • वर्ल्ड एथलेटिक्स रैंकिंग का उपयोग मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की तुलना के लिए किया जाता है।
  • अहमदाबाद, गुजरात की प्रमुख शहरों में से एक है और यह मैराथन अब वैश्विक रोड-रेस कैलेंडर का हिस्सा बन गई है।

#Run4OurSoldiers पहल के साथ जुड़ी यह मैराथन नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच एक प्रतीकात्मक सेतु भी बनी हुई है। वैश्विक मान्यता मिलने के बाद इसका खेल और सामाजिक महत्व दोनों और बढ़ गया है।

Originally written on October 5, 2026 and last modified on October 5, 2026.

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