एशियाई खेलों में भारत की कुश्ती ने रचा नया अध्याय

एशियाई खेलों में भारत की कुश्ती ने रचा नया अध्याय

जापान के आइची-नागोया 2026 एशियाई खेलों में भारत ने कुश्ती में छह पदक जीतकर अपना अब तक का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन दर्ज किया। इनमें दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल रहे। पदक संख्या के लिहाज से यह 1962 के जकार्ता एशियाई खेलों के बाद भारत का सर्वश्रेष्ठ कुश्ती अभियान है, जब देश ने 12 पदक जीते थे।

स्वर्ण पदकों ने बदली तस्वीर

भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि पुरुष फ्रीस्टाइल में आई, जहां अमन सहरावत ने 57 किग्रा वर्ग में उत्तर कोरिया के मौजूदा विश्व चैंपियन हान चोंग सोंग को 11-7 से हराकर स्वर्ण जीता। इसके एक दिन पहले सुजीत कलकल ने 65 किग्रा वर्ग में ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुदिएव को 10-9 से मात देकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया। इन दोनों जीतों ने भारतीय कुश्ती की गहराई और प्रतिस्पर्धी क्षमता को फिर से सामने रखा।

रजत और कांस्य ने बढ़ाई पदक सूची

महिला 53 किग्रा वर्ग में अंतिम पंघाल ने रजत पदक जीता, जबकि पुरुष ग्रीको-रोमन 97 किग्रा वर्ग में नितेश सिवाच ने भी रजत अपने नाम किया। कांस्य पदकों की बात करें तो दीपक पुनिया ने पुरुष फ्रीस्टाइल 97 किग्रा वर्ग में और सुनील कुमार ने पुरुष ग्रीको-रोमन 87 किग्रा वर्ग में तीसरा स्थान हासिल किया। इस तरह भारत ने फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन, दोनों शैलियों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

भारतीय कुश्ती के लिए ऐतिहासिक संकेत

यह अभियान सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई ऐतिहासिक उपलब्धियों से भी जुड़ा रहा। अमन सहरावत और सुजीत कलकल के जरिए भारत ने 1978 के बाद पहली बार एशियाई खेलों में पुरुष फ्रीस्टाइल में दो स्वर्ण जीते। नितेश सिवाच ने ग्रीको-रोमन में भारत के 64 साल के पदक-इंतजार को खत्म किया। वहीं सुनील कुमार एशियाई खेलों में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान बन गए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एशियाई खेलों की कुश्ती में पुरुषों के लिए फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन, जबकि महिलाओं के लिए फ्रीस्टाइल स्पर्धाएं होती हैं।
  • कुश्ती के अंतरराष्ट्रीय नियम और भार वर्गों का संचालन यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग करती है।
  • जकार्ता 1962 भारत का एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ कुश्ती प्रदर्शन माना जाता है, जब 12 पदक आए थे।
  • आइची-नागोया 2026 में भारत ने कुल छह पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल रहे।

आइची-नागोया 2026 का यह प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहा। अलग-अलग भार वर्गों में मिले ये नतीजे दिखाते हैं कि भारत अब सिर्फ कुछ चुनिंदा नामों पर नहीं, बल्कि व्यापक प्रतिभा-आधार पर आगे बढ़ रहा है।

Originally written on October 5, 2026 and last modified on October 5, 2026.

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