एएनआरएफ ने अनुसंधान अनुदान के लिए नए प्रकटीकरण नियम लागू किए

एएनआरएफ ने अनुसंधान अनुदान के लिए नए प्रकटीकरण नियम लागू किए

भारत में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली शीर्ष संस्था अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने 4 मई 2026 को अपने एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट (एआरजी) कार्यक्रम के लिए नए और सख्त प्रकटीकरण नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य शोध कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नैतिकता को मजबूत करना है। अब शोधकर्ताओं को अपने पिछले प्रकाशनों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा करना अनिवार्य होगा।

एएनआरएफ और इसकी भूमिका

एएनआरएफ की स्थापना अगस्त 2023 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन अधिनियम, 2023 के तहत की गई थी। यह संस्था भारत में अनुसंधान और नवाचार के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संगठनों को प्रतिस्पर्धात्मक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले शोध को प्रोत्साहन मिल सके।

एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट (एआरजी) कार्यक्रम

एआरजी कार्यक्रम के तहत 2026 चक्र के लिए प्री-प्रपोजल 15 मई से 10 जून 2026 तक ऑनलाइन आमंत्रित किए गए हैं। इस योजना के तहत चयनित परियोजनाओं को अधिकतम 5 वर्षों के लिए ₹5 करोड़ तक की वित्तीय सहायता दी जा सकती है। यह अनुदान उपकरण, मानव संसाधन और यात्रा जैसे विभिन्न खर्चों को कवर करता है। इस बार संशोधित ढांचे के तहत विभिन्न संस्थानों से अधिकतम पांच सह-अन्वेषकों (Co-PIs) को शामिल करने की अनुमति दी गई है।

नए प्रकटीकरण और एआई उपयोग के नियम

नए नियमों के अनुसार, मुख्य अन्वेषक (PI) और सह-अन्वेषकों को पिछले पांच वर्षों में हुए किसी भी प्रकाशन वापसी (retraction) के बारे में कारण सहित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, उन्हें यह घोषणा भी करनी होगी कि उनका प्रस्ताव पूरी तरह से एआई द्वारा तैयार नहीं किया गया है। यदि प्रस्ताव में एआई की सहायता ली गई है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। एएनआरएफ ने साहित्यिक चोरी (plagiarism) के खिलाफ शून्य-सहनशीलता नीति अपनाई है। इसके तहत प्रस्तावों की तीसरे पक्ष द्वारा जांच की जा सकती है। साथ ही, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के लिए पहले लागू 50% लागत-साझेदारी की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है।

अनुसंधान में पारदर्शिता का महत्व

इन नए नियमों का उद्देश्य अनुसंधान में विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बढ़ाना है। हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर शोध पत्रों की वापसी (retraction) की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे वैज्ञानिक समुदाय की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे हैं। ऐसे में एएनआरएफ के ये कदम भारतीय शोध प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और जिम्मेदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एएनआरएफ की स्थापना अगस्त 2023 में की गई थी।
  • एआरजी कार्यक्रम के तहत अधिकतम ₹5 करोड़ तक का अनुदान पांच वर्षों के लिए दिया जाता है।
  • 2026 के लिए प्री-प्रपोजल 15 मई से 10 जून तक आमंत्रित किए गए हैं।
  • वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर लगभग 4000 शोध पत्र वापस लिए गए, जिनमें भारत का योगदान 20% था।

एएनआरएफ द्वारा लागू किए गए ये नए नियम न केवल शोध की गुणवत्ता को बढ़ाएंगे, बल्कि भारत को वैश्विक अनुसंधान परिदृश्य में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार देश के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेंगे।

Originally written on May 4, 2026 and last modified on May 4, 2026.

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