एआई के लिए भारत का ‘एआई फॉर ऑल’ दृष्टिकोण वैश्विक मंचों पर हुआ प्रमुखता से प्रस्तुत

एआई के लिए भारत का ‘एआई फॉर ऑल’ दृष्टिकोण वैश्विक मंचों पर हुआ प्रमुखता से प्रस्तुत

भारत ने जून 2026 में फ्रांस के पेरिस में आयोजित वीवाटेक 2026 और जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए अपने मानव-केंद्रित और समावेशी दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की एआई नीति को “एआई फॉर ऑल” अर्थात “सभी के लिए एआई” के रूप में परिभाषित करते हुए तकनीक तक समान पहुंच, सुरक्षा, जवाबदेही और वैश्विक कल्याण पर विशेष बल दिया। भारत का यह दृष्टिकोण एआई को केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित न रखकर समाज के व्यापक हितों से जोड़ने का प्रयास करता है।

एआई फॉर ऑल और मानव-केंद्रित विकास

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) ऐसी कंप्यूटर प्रणालियों को संदर्भित करती है जो मानव बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यों जैसे पैटर्न पहचान, भाषा प्रसंस्करण, निर्णय समर्थन और डेटा विश्लेषण को संपन्न कर सकती हैं। भारत का मानना है कि एआई का विकास लोगों की आवश्यकताओं और हितों को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए। वीवाटेक 2026 में भारत ने “एआई कंट्री पार्टनर” के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर एआई को व्यापक पहुंच, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ते हुए यह संदेश दिया गया कि तकनीक का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। भारत का “एआई फॉर ऑल” दृष्टिकोण डिजिटल समावेशन और तकनीकी लोकतंत्रीकरण पर आधारित है।

सुरक्षित और समावेशी एआई के लिए भारत के चार सुझाव

18 जून 2026 को आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन सत्र में भारत ने सुरक्षित और समावेशी एआई विकास के लिए चार महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। पहला, “सेफ-बाय-डिजाइन” एआई प्रणालियों को बढ़ावा देना, जिसमें सुरक्षा उपायों को विकास के प्रारंभिक चरण से ही शामिल किया जाता है। दूसरा, वैश्विक स्तर पर समान मानकों और नियामकीय सैंडबॉक्स का निर्माण। नियामकीय सैंडबॉक्स ऐसे नियंत्रित वातावरण होते हैं जहां नई तकनीकों का पर्यवेक्षण के तहत परीक्षण किया जाता है। तीसरा, डीपफेक और साइबर धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना। डीपफेक एआई तकनीकों द्वारा निर्मित नकली ऑडियो, वीडियो या छवियां होती हैं जो भ्रामक जानकारी फैला सकती हैं। चौथा, ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को एआई तकनीकों तक अधिक पहुंच प्रदान करना, ताकि तकनीकी असमानता कम हो सके।

एम.ए.एन.ए.वी. विजन और एआई शासन

भारत का एम.ए.एन.ए.वी. विजन एआई के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। इसका विस्तार है—मोरल एंड एथिकल सिस्टम्स, अकाउंटेबल गवर्नेंस, नेशनल सॉवरेनिटी, एक्सेसिबल एंड इन्क्लूसिव एआई तथा वैलिड एंड लेजिटिमेट सिस्टम्स। इस दृष्टिकोण पर फरवरी 2026 में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में चर्चा की गई थी और जून 2026 के जी7 शिखर सम्मेलन में भी इसका उल्लेख किया गया। इसके अतिरिक्त नवंबर 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत एआई गवर्नेंस दिशानिर्देशों के मसौदे के लिए एक समिति का गठन किया था। ये दिशानिर्देश सात सूत्रों पर आधारित हैं, जिनमें विश्वास, लोगों को प्राथमिकता तथा निष्पक्षता और समानता प्रमुख हैं।

वैश्विक एआई सहयोग में भारत की भूमिका

भारत लगातार वैश्विक मंचों पर मानव-केंद्रित और समावेशी एआई विकास का समर्थन करता रहा है। नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भारत ने खुले स्रोत और मानव-केंद्रित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का समर्थन किया था। वहीं अप्रैल 2025 में “एआई फॉर वन ह्यूमैनिटी” संवाद में भी भारत ने समावेशी एआई भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वीवाटेक फ्रांस के पेरिस में आयोजित होने वाला एक प्रमुख वार्षिक प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप कार्यक्रम है।
  • जी7 विश्व की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है।
  • नियामकीय सैंडबॉक्स का उपयोग फिनटेक, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
  • MeitY का पूर्ण नाम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय है, जो भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है।

भारत का “एआई फॉर ऑल” दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि भविष्य की तकनीकों का विकास केवल नवाचार के लिए नहीं, बल्कि मानव कल्याण, समान अवसर और वैश्विक सहयोग के लिए भी होना चाहिए। सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी एआई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता उसे वैश्विक डिजिटल शासन में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित कर रही है।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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