ऊर्जा स्टार्टअप्स को नई रफ्तार देगा एमसी²+ इग्नाइट कार्यक्रम
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एमसी²+ ने ‘इग्नाइट’ नाम से एक विशेष एक्सेलरेटर कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए बनाई गई है, खासकर उन उद्यमों के लिए जो प्रोटोटाइप से शुरुआती पायलट चरण में हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ 19 अगस्त 2026 को आईआईटी मद्रास में हुआ, जिसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, तेल-गैस सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और बीपी इंडिया की भागीदारी रही।
ऊर्जा नवाचार के लिए साझा मंच
एमसी²+ दरअसल एमसी² फाउंडेशन का एक ब्रांड है, जिसे भारत के तेल और गैस क्षेत्र की तकनीकी चुनौतियों को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। फाउंडेशन का मकसद सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और शोध संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाकर शोध और निवेश में होने वाली दोहराव को कम करना है। ऊर्जा मूल्य-श्रृंखला में तकनीकी समाधान तलाशने वाले स्टार्टअप्स के लिए यह मॉडल उद्योग और नवाचार के बीच सीधा पुल तैयार करता है।
स्टार्टअप्स को फंडिंग और पायलट टेस्टिंग का अवसर
एमसी²+ इग्नाइट के पहले बैच में लगभग 30 स्टार्टअप्स चुने जाने की योजना है। चयनित स्टार्टअप्स को माइलस्टोन-लिंक्ड कन्वर्टिबल फंडिंग के रूप में अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकती है। इसमें शुरुआती तौर पर 50 लाख रुपये तक की फंडिंग और आगे प्रदर्शन के आधार पर 1.5 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त राशि शामिल हो सकती है।
कार्यक्रम का मुख्यालय दिल्ली में होगा, जबकि इसके विकेंद्रीकृत नोड्स प्रायोजक पीएसयू कंपनियों के आरएंडडी केंद्रों में बनाए जाएंगे। इन नोड्स के जरिए स्टार्टअप्स को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में अपनी ऊर्जा तकनीकों के परीक्षण के लिए पायलट साइट्स तक पहुंच मिलेगी।
संस्थागत साझेदारी और उद्योग की भागीदारी
इस कार्यक्रम को आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी बॉम्बे, सी-सीएएमपी और वेंचर सेंटर, पुणे जैसे संस्थानों का सहयोग मिला है। इन संस्थानों की भूमिका प्रयोगशाला सुविधाएं, मेंटरशिप और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने में होगी। ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों में ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, गेल, ऑयल इंडिया और पेट्रोनेट एलएनजी इस मंच से जुड़े हैं।
बताया गया है कि ये पीएसयू पहले वर्ष में इस प्लेटफॉर्म के लिए 70 से 80 करोड़ रुपये तक का योगदान कर सकते हैं। आवेदन विंडो 5 अगस्त 2026 को खोली गई थी और 31 अगस्त 2026 तक खुली रहने की योजना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डीप-टेक स्टार्टअप्स वे होते हैं जो ऊर्जा, सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव-प्रौद्योगिकी जैसी उन्नत वैज्ञानिक-इंजीनियरिंग तकनीकों पर आधारित होते हैं।
- आईआईटी मद्रास, संस्थान अधिनियम, 1961 के तहत ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ है।
- कन्वर्टिबल फंडिंग ऐसी वित्तीय सहायता है, जो तय शर्तों पर इक्विटी में बदल सकती है।
- ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, गेल, ऑयल इंडिया और पेट्रोनेट एलएनजी भारत के प्रमुख ऊर्जा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक, पायलट परीक्षण और उद्योग-शोध साझेदारी को एक साथ जोड़ने की यह पहल स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे ऐसे समाधान सामने आने की उम्मीद है जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक और स्केलेबल हों।